वायरल फीवर: कई राज्यों में तेजी से फैल रहा डेंगू, बच्चों के लिए ही क्यों है बड़ा खतरा?

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नई दिल्ली। देश के कई राज्यों में डेंगू का कहर जारी है। सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही पिछले एक महीने में कई मौतें इस वजह से हो चुकी हैं। मरने वालों में ज्यादातर बच्चे ही हैं। मथुरा और फिरोजाबाद के अलावा कानपुर, प्रयागराज और गाजियाबाद से तो लगातार डेंगू के मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि बच्चे ही सबसे ज्यादा क्यों संक्रमित हो रहे हैं और उन्हें इस संक्रमण से कैसे बचाया जा सकता है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ 
विशेषज्ञों का कहना है कि डेंगू ऐसी बीमारी है जो किसी को भी हो सकती है। लेकिन इस बार इससे बच्चे ज्यादा संक्रमित हो रहे हैं। कारण यह है कि बच्चों का प्रतिरक्षा तंत्र वयस्कों के मुकाबले कमजोर होता है। साल में छह से आठ बार वे श्वसन संबंधी संक्रमण से ग्रसित होते हैं। इधर, लॉकडाउन खुलने के बाद बड़ी संख्या में बच्चे बाहर आ रहे हैं और बाहर का दूषित खाना और गंदा पानी पी रहे हैं। यही कारण है कि उनमें संक्रमण का खतरा भी सबसे ज्यादा है।

मानसून के बाद तेजी से फैलता है वायरल फीवर 
मानसून के बाद कई जगहों पर पानी का जमाव हो जाता है। ऐसे में डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया जैसे रोग तेजी से फैलते हैं। इससे बचने के लिए घर पर पानी का जमाव न होने दें और जहां पर भी पानी जमा जमा होता है उसे हर रोज बदलते रहें।

किस मच्छर के काटने से होता है डेंगू
डेंगू और चिकनगुनिया एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से होता है। यह मच्छर साफ पानी में पैदा होता है। वहीं एनोफिलीज मच्छर मलेरिया का कारक होता है जो गंदे व साफ दोनों तरह के पानी में प्रजनन करने में सक्षम है।

क्या हैं लक्षण 
अगर किसी को तेज बुखार के साथ ही साथ शरीर में दर्द है। पेट में भी दर्द जैसे लक्षण दिख रहे हैं तो उसमें डेंगू या अन्य मच्छर जनित बीमारियां होने की संभावना है। इसके अलावा भूख न लगना, शरीर पर चकत्ते पड़ना भी इसके संकेत हैं।

शरीर में पानी की न होने दें कमी
डॉक्टरों का कहना है कि अगर किसी में डेंगू के लक्षण दिखते हैं तो उसे पानी ज्यादा पीना चाहिए। शरीर में पानी की कमी होने से समस्या बढ़ सकती है। हालांकि, अगर किसी में ज्यादा लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो उसे सीधे डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

दिसंबर तक बढ़ सकता है डेंगू का खतरा 
आम तौर पर डेंगू या मच्छर जनित बीमारी जुलाई और नंवबर के बीच फैलती हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार मानसून के देर से विदा होने की संभावना के बीच बीमारी का खतरा भी दिसंबर तक यह बढ़ सकता है।

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