सरोगेसी कानून पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब! याचिकाकर्ता ने इस प्रावधान को दी है चुनौती

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लीगल डेस्क: सरोगेसी कानून के प्रावधानों को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए सरकार से प्रतिक्रिया मांगी है. इस याचिका पर आगे की कार्रवाई प्रतिक्रिया आने के बाद की जाएगी. दरअसल, अविवाहित महिलाएं सरोगेसी का लाभ ना उठा सकें, इसलिए सरोगेसी कानून में कुछ प्रावधानों हैं. इसे चुनौती देते हुए ही इसके खिलाफ याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है.

याचिका में सरोगेसी कानून के उस प्रावधान को चुनौती दी गई है, जिसमें अविवाहित महिलाओं को ‘इच्छुक महिला’ की परिभाषा के दायरे से बाहर रखा गया है. दरअसल, कानून के तहत इच्छुक महिलाओं में ऐसी भारतीय महिलाएं शामिल हैं, जो 35 से 45 साल की उम्र के बीच हों. इसके अलावा इस उम्र वर्ग की ऐसी विवाहित महिलाएं, जिनमें विधवा, तलाकशुदा या फिर किसी वजह से प्रजनन में अक्षम महिलाएं शामिल हैं.

इस याचिका पर नोटिस जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने जारी किया है. अविवाहित महिला की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए अदालत ने अपने आदेश में कहा कि याचिका की एक प्रति अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी के कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए. अब सुप्रीम कोर्ट इस अर्जी पर सरकार की प्रतिक्रिया आने के बाद ही सुनवाई आगे बढ़ाएगा.

क्या होती है सरोगेसी?

सरोगेसी का विकल्प उन महिलाओं के लिए काफी फायदेमंद साबित होता है जो प्रजनन से जुड़ी समस्याओं, गर्भपात या जोखिम भरे गर्भावस्था के कारण गर्भधारण नहीं कर सकतीं. सरोगेसी को आम भाषा में किराए की कोख भी कहा जाता है, यानी बच्चा पैदा करने के लिए जब कोई कपल किसी दूसरी महिला की कोख किराए पर लेता है, तो इस प्रक्रिया को सरोगेसी कहा जाता है, यानी सरोगेसी में कोई महिला अपने या फिर डोनर के एग्स के जरिए किसी दूसरे कपल के लिए प्रेग्नेंट होती है. अपने पेट में दूसरे का बच्चा पालने वाली महिला को सरोगेट मदर कहा जाता है.

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