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एंटी नक्सल ऑपरेशन में बड़ी कामयाबी : बंदूक छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़े 63 नक्सली

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दंतेवाड़ा| छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में चल रही लड़ाई अब सिर्फ मुठभेड़ों तक सीमित नहीं रह गई है। दंतेवाड़ा जिले में ‘लोन वर्राटू’ (घर वापसी) अभियान के तहत नक्सलियों का भरोसा तोड़ने की रणनीति रंग लाती दिख रही है। इसी क्रम में बुधवार को 63 नक्सलियों ने हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण किया, जिनमें 18 महिला नक्सली भी शामिल हैं। इसे बस्तर अंचल में नक्सलवाद के कमजोर पड़ने का बड़ा संकेत माना जा रहा है। ‘लोन वर्राटू’अभियान के तहत नक्सलियों को यह संदेश दिया जा रहा है कि हिंसा छोड़ने पर सरकार उन्हें सम्मानजनक जीवन का मौका देगी।

आत्मसमर्पण करने वालों में पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी के सचिव मोहन कड़ती भी शामिल हैं, जो अपनी पत्नी के साथ मुख्यधारा में लौटे हैं। मोहन कड़ती संगठन के रणनीतिक फैसलों में अहम भूमिका निभा चुका है। इन सभी नक्सलियों पर मिलाकर एक करोड़ रुपए से अधिक का इनाम घोषित था, जिससे उनकी संगठन में पकड़ और प्रभाव का अंदाजा लगाया जा सकता है। इस सामूहिक आत्मसमर्पण की खास बात यह रही कि इसमें छत्तीसगढ़ के बाहर सक्रिय रहे नक्सली भी शामिल हैं।

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह घटनाक्रम नक्सल नेटवर्क के मनोबल पर गहरा असर डालेगा और अन्य राज्यों में सक्रिय कैडर पर भी दबाव बढ़ाएगा। पुलिस और सुरक्षा बलों की ओर से लगातार चलाए जा रहे सर्च ऑपरेशन, संपर्क अभियान और मनोवैज्ञानिक दबाव ने नक्सलियों को संगठन छोड़ने के लिए मजबूर किया है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आर्थिक सहायता, आवास, शिक्षा और रोजगार से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

प्रशासन का दावा है कि इन पूर्व नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा में शामिल कर उन्हें नया जीवन देने की पूरी व्यवस्था की जाएगी। इस बड़े आत्मसमर्पण को बस्तर अंचल में शांति और विकास की दिशा में निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि संगठन के भीतर असंतोष और भरोसे की कमी बढ़ने से आने वाले दिनों में और भी नक्सली आत्मसमर्पण कर सकते हैं।

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