सड़कों की हालत पर हाई कोर्ट सख्त: न्यायमित्रों ने सरकारी दावों की खोली पोल, NHAI-PWD अधिकारियों से मांगी रिपोर्ट
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के शहरी व ग्रामीण सड़कों की बदहाली को लेकर बिलासपुर हाई कोर्ट चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने स्वत: संज्ञान में लेते हुए जनहित याचिका के रूप में सुनवाई प्रारंभ की है। स्वत: संज्ञान के अलावा एक और जनहित याचिका दायर की गई है। दोनों पीआईएल की डिवीजन बेंच में एकसाथ सुनवाई चल रही है। आज राज्य शासन ने सड़कों की स्थिति को लेेकर जवाब पेश किया। न्यायमित्र सीनियर एडवोकेट राजीव श्रीवास्तव व प्रतीक शर्मा ने राज्य शासन के दावों की पोल खोलते हुए सड़कों की बदहाली और अधूरे निर्माण को लेकर रिपार्ट पेश की।
मंगलवार को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच में जनहित याचिका पर सुनवाई प्रारंभ हुई। राज्य शासन की ओर से शपथ पत्र के साथ जानकारी पेश की गई। इसमें राज्य की सड़कों के निर्माण व मेंटनेंस को लेकर जानकारी दी गई थी। प्रदेशभर की सड़कों की रिपोर्ट पेश करने और निर्माण कार्य की निगरानी के लिए हाई कोर्ट ने सीनियर एडवाेकेट राजीव श्रीवास्तव व अधिवक्ता प्रतीक शर्मा को न्यायमित्र बनाया है। राज्य शासन द्वारा पेश शपथ पत्र का विरोध करते हुए सीनियर एडवोकेट राजीव श्रीवास्तव व अधिवक्ता प्रतीक शर्मा ने डिवीजन बेंच को बताया, वर्तमान में नए मार्गो का विकास पूर्ण रूप से नहीं हो पाया है। साथ ही उन्होंने न्यायालय का ध्यान इस ओर आकर्षित किया, राज्य सरकार द्वारा पूर्व में पेश किए गए शपथ पत्र और वर्तमान में पेश शपथ पत्र में कोई सारभूत अंतर नहीं है। राज्य भर में सड़कों के निर्माण व सुधार में कोई विशेष प्रगति नहीं हो पाई है। लोग आज भी परेशान है। सड़कों की खराब स्थिति के चलते लोगों की दिक्कतें बढ़ी हुई है। न्यायमित्रों ने बताया, कटघोरा-अंबिकापुर सड़क मार्ग का निर्माण बहुत समय से लंबित है। न्यायमित्रों के खुलासे के बाद डिवीजन बेंच ने एनएचएआई और पीडब्ल्यू के आला अफसरों को सड़कों के निर्माण में गंभीरता बरतने और जल्द निर्माण कार्य को पूरा करने का निर्देश दिया है।