पटाखा-प्लास्टिक दुकान आग कांड: कोर्ट ने प्रवीण अग्रवाल की अग्रिम जमानत याचिका की खारिज

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सरगुजा। प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अंबिकापुर, ममता पटेल ने अग्रिम जमानत आवेदन पर सुनवाई करते हुए व्यवसायी प्रवीण कुमार अग्रवाल की जमातन खारिज कर दिया है। आदेश में कोर्ट ने लिखा है, दुकान संचालन के संबंध में जो दस्तावेज जमानत आवेदन के साथ लगाये गये हैं, वे दस्तावेज विवेचना अधिकारी द्वारा अपेक्षित होना प्रकट होता है। गंभीर अपराध में अग्रिम जमानत मिल जाने की दशा में लिखित एवं मौखिक साक्ष्य को प्रभावित करने की आशंका को भी अनदेखा नहीं किया जा सकता। उपरोक्त तथ्यों एवं प्रकरण की परिस्थितियों को देखते हुए आवेदक को अग्रिम जमानत का लाभ दिया जाना उचित प्रतीत नहीं होने के कारण उसकी ओर से प्रस्तुत यह अग्रिम जमानत आवेदन अंतर्गत धारा 482 बी.एन.एस.एस. 2023 खारिज किया जाता है।

23 अप्रैल 2026 को राम मंदिर रोड स्थित दुकान नंबर 67/29 प्रवीण एजेंसी में, बिजली के शॉर्टसर्किट से आगजनी की घटना घटी, जिसकी सूचना उसके द्वारा 24 अप्रैल 2026 को थाना अंबिकापुर में दी गयी परिसर में प्लास्टिक के सामानों का थोक एवं खुदरा व्यवसाय किया जाता रहा है, जिसके लिए उसके द्वारा नियमानुसार 22 जनवरी 2024 को भारत सरकार से जीएसटी पंजीयन क्रमांक 22AHXPA685782ZC लिया गया है, जिसमें व्यवसायिक स्थल का पूरा विवरण दर्ज है, तथा भारत सरकार के उद्यम विभाग से भी पंजीयन क्रमांक उद्यम सी.जी.-16-0009697 प्राप्त किया गया है। उक्त परिसर किराये का है, जिसके कारण सहमति पत्र 08 जनवरी 2024 प्राप्त कर उक्त दुकान का उपयोग कर रहा है। वह प्रवीण एजेंसी का आधिपत्यधारी या नियंत्रणकर्ता है, जहां प्लास्टिक सामानों का व्यवसाय संचालित है।

सूचनाकर्ता द्वारा दर्ज कराये गये रिपोर्ट में इस आशय का रिपोर्ट दर्ज नहीं कराया गया है कि किसी ऐसे निर्माण, जो मानव विकास के रूप में या संपत्ति की अभिरक्षा के स्थान के रूप में उपयोग में आता तो, नाश कारित करने के आशय से अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा कारित किया गया है। उक्त मामले में लापरवाही और उपेक्षा के कारण उपरोक्त घटना घटित होने के संबंध में रिपोर्ट दर्ज कराया गया है। प्रकरण में पुलिस अधीक्षक के द्वारा प्रथम सूचना रिपोर्ट के अवलोकन पश्चात प्रकरण में धारा 324 व 326 (छ) प्रथम सूचना रिपोर्ट में नहीं जोड़े जाने के संबंध में कार्यवाही किये जाने हेतु नोटिस दिये जाने पर थाना अंबिकापुर द्वारा उक्त धारा जोड़ दिया गया है, जिससे उसकी स्वतंत्रता तथा विवेचना में सहयोग करने की प्रत्यासा प्रभावित हुई है।

आवेदक व्यवसायी ने अग्रिम जमानत मिलने की स्थिति में पुलिस जांच में सहयोग करने और कहीं अन्यत्र फरार नहीं होने कोर्ट को, आश्वासन भी दिया। व्यवसायी ने अपने आवेदन में बताया, वह सरगुजा जिले का स्थानीय निवासी है, तथा नगर का सफल व्यवसायी है, जिसके नाम पर चल-अचल संपत्ति विद्यमान है। जमानत मिलने की स्थिति में अन्यत्र पलायन करने की कोई संभावना नहीं है। जमानत आवेदन में कहा है,उसके विरूद्ध दर्ज अपराध आजीवन कारावास से दण्डनीय नहीं है। वह जमानत की शर्तों का पालन करने हेतु तत्पर है।

राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक द्वारा आवेदक के द्वारा कारित अपराध की गम्भीरता को देखते हुए उसकी ओर से प्रस्तुत अग्रिम जमानत आवेदन निरस्त किये जाने की मांग की।

केस डायरी के अवलोकन से साफ है, प्रार्थी प्रतुल पाण्डेय द्वारा थाना अंबिकापुर में लिखित शिकायत प्रस्तुत की गई, प्रार्थी के घर के पिछले हिस्से में मुकेश अग्रवाल, सह-आरोपी की दुकान है, जिसका संचालन मुकेश अग्रवाल का साला प्रवीण अग्रवाल करता है। उक्त दुकान में पटाखा व प्लास्टिक का भण्डारण कर बिक्री की जाती है। 23 अप्रैल 2026 को उक्त दुकान की छत पर वेल्डिंग का कार्य चल रहा था, जिससे आग की चिंगारी छिटकने से दुकान व गोदाम में आग लग गयी तथा आग और पटाखा जलने में विकराल भयावह रूप ले लिया, तथा आग की लपटें प्रार्थी प्रतुल पांडेय के घर के अंदर आ गयी, जिससे उसका एसी, टीवी, बेड, सोफा व घर का अन्य सामान जल कर खाक हो गया तथा घर की दीवारों में मोटी दरार आ गयी है। मुकेश अग्रवाल व प्रवीण अग्रवाल द्वारा जान-बूझकर घने रिहायशी क्षेत्र में अवैध रूप से भारी मात्रा में पटाखे का भंडारण करने की लापरवाही से इतनी बड़ी आगजनी की घटना हो गयी। उक्त घटना से आम जीवन संकटापन्न हो गया था, तथा आस-पास के कई मकान व लोग प्रभावित हुए हैं, जिससे लोगों को बहुत बड़ा नुकसान हुआ है।

प्रतुल पांडेय की लिखित शिकायत के आधार पर 26 अप्रैल 2026 को आवेदक प्रवीण कुमार एवं सह-आरोपी मुकेश अग्रवाल के विरूद्ध थाना अंबिकापुर में अपराध क्रमांक 259/2026 धारा 125, 270, 287 बीएनएस के तहत नामजद एफआईआर दर्ज कर विवेचना कार्यवाही की जा रही है। विवेचना के दौरान प्रभावित व्यक्तियों व प्रत्यक्षदर्शी साक्षियों के कथनों, घटना स्थल से अधजले पटाखों की जप्ती तथा एफएसएल परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर प्रकरण में धारा 324 (6), 326 (छ) बीएनएस व विस्फोटक अधिनियम की धारा 9 (ख) (i) (ख) बीएनएस का अपराध जोड़ा गया है। धारा 326 (छ) बीएनएस का अपराध, आजीवन कारावास या दस वर्ष तक के कारावास तथा जुर्माने से दण्डनीय है।

पुलिस प्रतिवेदन में लिखा है, आरोपीगण द्वारा संकरी गली व घनी रिहायशी क्षेत्र में पटाखा दुकान संचालित करने पर आस-पास रहने वालों द्वारा कई बार आपत्ति करने पर भी पटाखा दुकान को नहीं हटाया गया था, तथा सुरक्षा के मानकों का पालन नहीं किया गया था। आरोपीगण द्वारा पटाखा व प्लास्टिक, अति ज्वलनशील होने के बावजूद, पटाखा दुकान के ऊपर छत में वेल्डिंग कार्य कराया जा रहा था, आग लग जाने से आस-पास के लोगों को जान-माल का खतरा हुआ और लगभग 50 से 55 लाख रूपये की क्षति हुई है तथा एक बच्ची भी घटना में आहत हो गयी है। अतः आवेदक आरोपी को जमानत का लाभ न दिया जाए।

कोर्ट ने अपने फैसले में लिखा है, केस डायरी के अनुसार घटना स्थल से कई अधजले पटाखे जप्त किये गये हैं। पुलिस द्वारा साधारण अपराध दर्ज किये जाने के उपरांत, पुलिस महानिरीक्षक के निर्देश पर गंभीर अपराध की अतिरिक्त धाराएं जोड़ी गयी हैं, परंतु मात्र इस कारण अभियोजन का मामला झूठा बनाया गया होना नहीं कहा जा सकता। घटना स्थल पर केवल प्लास्टिक की दुकान संचालित होने का तर्क, बचाव स्तर पर साक्ष्य उपरांत विचारणीय है। घने रिहायशी इलाके में इस प्रकार के ज्वलनशील पदार्थों की दुकान/गोदाम होने की दशा में, संचालकों द्वारा विशेष सावधानी बरतने तथा सुरक्षा मानकों का प्रबंध किये जाने का दायित्व होता है।

केस डायरी से यह भी दर्शित होता है, विवेचना प्रारंभिक स्तर पर है तथा आरोपीगण के न मिलने के कारण, उनकी पतासाजी की जा रही होना लेख है, अर्थात् आरोपी द्वारा विवेचना में सहयोग नहीं किया जा रहा है। कथित दुकान संचालन के संबंध में जो दस्तावेज जमानत आवेदन के साथ लगाये गये हैं, वे दस्तावेज विवेचना अधिकारी द्वारा अपेक्षित होना प्रकट होता है। गंभीर अपराध में अग्रिम जमानत मिल जाने की दशा में लिखित एवं मौखिक साक्ष्य को प्रभावित करने की आशंका को भी अनदेखा नहीं किया जा सकता।

उपरोक्त तथ्यों एवं प्रकरण की परिस्थितियों को देखते हुए आवेदक को अग्रिम जमानत का लाभ दिया जाना उचित प्रतीत नहीं होने के कारण उसकी ओर से प्रस्तुत यह अग्रिम जमानत आवेदन अंतर्गत धारा 482 बी.एन.एस.एस. 2023 खारिज किया जाता है।