हाई कोर्ट का अहम फैसला: फांसी की सजा को उम्रकैद में बदला, डिवीजन बेंच बोली- मामला नहीं है ‘दुर्लभतम’

1154216-hc-high-court

बिलासपुर। हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने रेप और हत्या के मामले में दोषी को दी गई फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की बेंच ने कहा कि मृत्युदंड केवल “दुर्लभतम मामलों” में ही दिया जा सकता है, जबकि इस मामले में ऐसा कोई ठोस आधार नहीं मिला जिससे यह साबित हो कि आरोपी के सुधार या पुनर्वास की कोई संभावना नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि दोषसिद्धि पूरी तरह परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित थी, इसलिए मृत्युदंड जैसी अपरिवर्तनीय सजा देने में अतिरिक्त न्यायिक सावधानी जरूरी थी।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि निचली अदालत ने सजा तय करते समय अपराध की गंभीरता पर अधिक जोर दिया, लेकिन आरोपी के सुधार की संभावना और अन्य परिस्थितियों पर पर्याप्त विचार नहीं किया। ऐसे में फांसी की सजा कानून के मानकों पर खरी नहीं उतरती। हालांकि अदालत ने अपराध को गंभीर मानते हुए आरोपी की सजा को उसके शेष प्राकृतिक जीवन तक के लिए आजीवन कारावास में बदल दिया।

मामला 2022 का है। बेमेतरा फैमिली कोर्ट में कार्यरत 25 वर्षीय युवती 14 अगस्त 2022 को घर से निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। जांच में सामने आया कि आरोपी उसे स्कूटी पर पालगड़ा घाटी क्षेत्र की ओर ले गया था। बाद में आरोपी ने सुनसान जंगल में युवती की हत्या और दुष्कर्म करना स्वीकार किया था। निचली अदालत ने आरोपी को फांसी की सजा सुनाई थी, जिसकी पुष्टि के लिए मामला हाई कोर्ट भेजा गया था।

रीसेंट पोस्ट्स