शिक्षा व्यवस्था पर कलेक्टर का सख्त रुख, फेल स्कूलों के प्राचार्यों पर गिरी गाज, कलेक्टर बोले- जवाबदेही तय कर होगी कार्रवाई
बिलासपुर। जिले के कलेक्टर संजय अग्रवाल बोर्ड परीक्षाओं के नतीजे सरकारी स्कूलों में कमजोर आने पर बेहद गंभीर हैं। उन्होंने आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के बाद सभी सरकारी स्कूलों के प्राचार्यों की बैठक ली। बैठक में कक्षा दस और 12 के परीक्षा परिणामों की समीक्षा की गई। जिन स्कूलों के नतीजे अपेक्षा के अनुरूप नहीं आए हैं, वे स्कूल कलेक्टर के निशाने पर रहे। उन्होंने बैठक में इनसे संबंधित प्राचार्यों को जमकर फटकार लगाई। बैठक में प्राचार्य सन्नाटे में आ गए, जब कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि बोर्ड परीक्षा में कमजोर प्रदर्शन किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। साथ ही अगले सत्र के लिए प्रत्येक स्कूल को लक्ष्य निर्धारित कर कार्य करने को कहा। इसके उलट कलेक्टर ने बेहतर परिणाम लाने वाले स्कूलों के प्राचार्यों को खड़ा करा उनको शाबाशी भी दी।
कलेक्टोरेट के प्रार्थना सभा कक्ष में आयोजित जिले के सरकारी स्कूलों के प्राचार्यों की बैठक में कलेक्टर संजय अग्रवाल ने अपना विजन भी साफ कर दिया। उन्होंने कहा कि केवल औपचारिक पढ़ाई से काम नहीं चलेगा, बल्कि कमजोर विद्यार्थियों की अलग से पहचान कर उन्हें विशेष मार्गदर्शन देना होगा। उन्होंने प्राचार्योंं और शिक्षकों को निर्देश दिए कि सालभर नियमित टेस्ट, अतिरिक्त कक्षाएं और सतत मॉनिटरिंग के जरिए परिणाम सुधारने की दिशा में गंभीरता से काम करें। कलेक्टर ने कहा कि कई स्कूलों में परिणाम बेहद निराशाजनक रहे हैं, जो शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि आगामी सत्र में यदि सुधार नहीं हुआ तो संबंधित स्कूल प्रबंधन और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
इस बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे सहित शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी के बीच स्कूलवार रिजल्ट, फेल प्रतिशत और पूरक आए विद्यार्थियों की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। कलेक्टर ने विशेष रूप से उन स्कूलों पर ध्यान केंद्रित करने को कहा जहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी पूरक या अनुत्तीर्ण हुए हैं। कलेक्टर ने कहा कि बच्चों का भविष्य सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी छात्र को पढ़ाई से दूर नहीं होने दिया जाएगा।
समीक्षा बैठक में कलेक्टर संजय अग्रवाल ने प्राचार्यों को निर्देश दिए कि बोर्ड परीक्षा में पूरक अथवा अनुत्तीर्ण हुए सभी विद्यार्थियों से व्यक्तिगत संपर्क किया जाए। साथ ही उन्होंने प्राचार्य और शिक्षकों को जिम्मेदारी दी कि ऐसे छात्रों की सूची बनाकर उन्हें दोबारा होने वाली अवसर परीक्षा में शामिल कराकर पास कराने का लक्ष्य दिया। इसके लिए स्कूलों को सुबह आठ बजे से दस बजे तक कक्षाएं लगाने को कहा गया। इस विशेष कक्षाएं में छात्रों को अतिरिक्त मार्गदर्शन और विषयवार तैयारी कराने की बात कहीं गई, ताकि सभी छात्र सफल हो सकें।
अब तक 183 प्राचार्यों को नोटिस
बताया गया है कि समीक्षा बैठक में 80 प्रतिशत से नीचे परिणाम लाने वाले स्कूलों के प्राचार्यों को कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्णय लिया गया। जिले में हायर सेकेण्डरी स्कूलों की संख्या 134 है। इसमें से 12वीं में खराब नतीजे लाने वाले 44 स्कूलों के प्राचार्यो को नोटिस जारी किया जाएगा। साथ ही हाई स्कूल 241 है। 10वीं में अस्सी प्रतिशत से कम परिणाम वाले 139 स्कूलों के प्राचार्यों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद उनके खिलाफ खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई के संकेत दिए गए हैं।