कोयला स्कैम में नया मोड़, लंबे समय तक फरार रहे आरोपी की सुप्रीम कोर्ट में अर्जी…
बिलासपुर। कोयला तस्करी से जुड़े मामले में चोरी और सबूत मिटाने के आरोपों का सामना कर रहे आरोपी गणेश वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर कर जमानत की मांग की है।
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस अतुल एस की डीविजन बेंच ने विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद राज्य शासन को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
याचिकाकर्ता गणेश वर्मा ने छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उसकी नियमित जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड जितेंद्र कुमार और अधिवक्ता आयुषी पांडेय ने पक्ष रखा। राज्य शासन की ओर से एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड अपूर्व शुक्ला और अधिवक्ता प्रभलीन शुक्ला उपस्थित हुए तथा नोटिस स्वीकार किया। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने मूल आदेश की प्रमाणित प्रति और आधिकारिक अनुवाद दाखिल करने से छूट संबंधी आवेदन भी प्रस्तुत किया , जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। राज्य शासन ने अगली सुनवाई से पूर्व विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का आश्वासन दिया है।
रायपुर के खम्हारडीह थाना क्षेत्र में दर्ज मामले में आरोप है कि 28 दिसंबर 2022 को कोयला तस्करी मामले के सरगना निखिल चंद्राकर के इशारे पर गणेश वर्मा उर्फ गोलू और उसके सहयोगियों ने एक महिला के घर का ताला खोलकर महत्वपूर्ण मेडिकल दस्तावेज और शैक्षणिक अंकसूचियां चोरी कर ली थी। जांच एजेंसियों का दावा है कि चोरी का उद्देश्य भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और 377 से जुड़े एक अन्य प्रकरण के महत्वपूर्ण साक्ष्यों को नष्ट करना था। पूरी घटना CCTV, कैमरे में रिकार्ड होने का भी दावा किया है।
छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य शासन ने तर्क दिया था कि आरोपी गणेश वर्मा लंबे समय तक फरार रहा और पुलिस ने उसे 20 मार्च 2026 को गिरफ्तार किया। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा के सिंगल बेंच में सुनवाई हुई। कोर्ट ने अपने फैसलेमे कहा है,आरोपी का आचरण गंभीर है और उसके पुनः फरार होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा था कि सह-आरोपियों को जमानत मिल जाने मात्र से आरोपी को समान राहत नहीं दी जा सकती। इसी आधार पर उसकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी थी।