रेत खरीदना होगा आसान! अब खदान से सीधे सरकारी रेट पर मिलेगी रेत, माफियाओं पर कसेगा शिकंजा
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने खनिज माफिया पर कड़ी कार्रवाई का आदेश सभी कलेक्टरों को दिया था। अब इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम यानी सीएमडीसी ने बड़ी पहल कर दी है। उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि सीएमडीसी को भी प्रदेश में कुछ रेत घाट पायलट प्रोजेक्ट के रूप में दिए गए हैं। इन्हीं रेत घाटों के जरिए सीएमडीसी अब रेत माफिया की कमर तोड़ने जा रहा है। यह प्रोजेक्ट लागू होते ही जनता को सरकारी रेट पर घर बैठे रेत मिलेगी और इसके बाद माफिया मनमाने तरीके से रेत का रेट नहीं बढ़ा सकेगा। हर साल माफिया बारिश से पहले ही रेत का अवैध भंडारण कर लेता है और उसके बाद बारिश के मौसम में बेलगाम तरीके से रेट बढ़ा कर बेचने लगता है। इससे मकान बनाने वाली जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ जाता है। सीएमडीसी ऐसा कर रेत आपूर्ति का नया सिस्टम बनाने जा रहा है। इसमें पैसे के साथ समय की भी बचत होगी। ऑनलाइन बिक्री में सभी नियम ऐसे बनाए गए हैं कि जनता को ही इससे फायदा हो सके।
खबर है कि सीएमडीसी ने पहले चरण में बिलासपुर जिले की घुटकू रेत खदान को ऑनलाइन सिस्टम के लिए चुना है। सिस्टम को लगभग फाइनल कर लिया गया है और इससे संबंधित नीति बना कर सरकार के पास भेज दी गई है। उम्मीद की जा रही है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय इसे मंजूर करेंगे और फिर बारिश के बाद नए सिस्टम से घुटकू घाट से रेत की ऑनलाइन बिक्री प्रारंभ हो जाएगी। ज्ञात हो कि रेत खदानों का सिस्टम बार- बार बदला गया है, मगर जनता को कहीं से भी राहत नहीं मिली है। पहले ग्राम पंचायतों तक को अधिकार दिया गया था, उस वक्त भी माफिया हावी रहा और अपने हिसाब से रेत की बिक्री करता रहा है। उसके बाद सभी रेत घाट की खुली निविदा के जरिए निजी हाथों को दिया गया, इससे रेत माफिया को अपना पर फैलाने का और मौका मिल गया। सरकार ठेके पर घाट देते वक्त नियम भी बताती है, मगर इसका कहीं पर भी पालन नहीं होता है। यहां तक घाट या बिक्री स्थल पर रेट सूची चस्पा करनी है, इस नियम को भी ठेकेदार मानते नहीं हैं। इसके बाद रेत माफिया सिंडिकेट बना कर मौसम और जरुरत के हिसाब से रेट तय करता है, जनता को मजबूरी में महंगी रेत खरीदनी पड़ती है। कहा जा रहा है कि माफिया का एकाधिकार खत्म करने के उद्देश्य से ही सीएमडीसी नई ऑनलाइन व्यवस्था शुरू कर खुद ही रेत के व्यवसाय में उतर रहा है। सरकार के स्तर पर अभी कुछ ही बिंदुओं पर विचार- विमर्श चल रहा है और उसके बाद स्वीकृति मिलते ही सीएमडीसी की वेबसाइट पर विंडो बना दिया जाएगा।
सीएमडीसी ने नीति बनाते वक्त जनता का ख्याल रखा है। इस कारण से रेत माफिया की मुश्किल बढ़ने वाली है। सीएमडीसी जैसे ही योजना शुरू करेगा, वैसे ही वेबसाइट पर इसका विंडो दिखेगा। उसमें जाने पर खदान का स्टेटस भी नजर आ जाएगा। इससे लोग जान सकेंगे कि वहां पर रेत उपलब्ध है अथवा नहीं। साथ ही रेत की सीमा भी तय कर दी जाएगी। इसमें एक दिन में अधिकतम ट्रक या ट्रैक्टर रेत दी जा सकेगी। रोजाना का रेट भी प्रदर्शित किया जा सकेगा और उसका भुगतान कर कोई भी व्यक्ति घर बैठे रेत मंगवा सकता है। इसका बड़ा फायदा यह होगा कि बिक्री के सिस्टम से ठेकेदार को हटा दिया जाएगा। सीएमडीसी खुद ही लोडिंग और अनलोडिंग का काम देखेगा। यह भी बताया जा रहा है कि परिवहन खर्च में स्पष्टता रहेगी। प्रति किलोमीटर के हिसाब से परिवहन खर्च देना होगा और माना जा रहा है कि 20 किमी के दायरे में रेत सस्ती ही पड़ेगी। इसमें भी ट्रक और ट्रैक्टर, दोनों का विकल्प जनता को मिलेगा।