हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: युक्तियुक्तकरण को चुनौती देने वाली 35 से ज्यादा याचिकाएं निरस्त, सरकार का निर्णय बरकरार
बिलासपुर। बिलासपुर हाई कोर्ट ने राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के युक्तिकरण और उनके स्थानांतरण को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है । जस्टिस बीडी गुरु के सिंगल बेंच ने युक्तिकरण की प्रशासनिक नीति को चुनौती देने वाली ‘छत्तीसगढ़ विद्यालयीन शिक्षक कर्मचारी संघ’ सहित कुल 35 से अधिक रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया है।
कोर्ट ने माना है, शिक्षकों का ट्रांसफर, पोस्टिंग और युक्तिकरण करना पूरी तरह से राज्य सरकार का विशेष प्रशासनिक विशेषाधिकार है, जिसमें अदालतें तब तक हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं जब तक कि कोई दुर्भावना साबित न हो।
राज्य सरकार ने सरकारी स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात को दुरुस्त करने के लिए 2 अगस्त 2024 को युक्तियुक्तकरण का निर्देश जारी किया था। जिसके तहत अप्रैल 2025 में भी अनुवर्ती आदेश जारी किए गए । इन निर्देशों के खिलाफ छत्तीसगढ़ विद्यालयीन शिक्षक कर्मचारी संघ और दुर्ग, कोंडागांव, कांकेर, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, कोरबा, बिलासपुर व रायपुर सहित कई जिलों के प्रभावित शिक्षकों ने छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं।
याचिकाकर्ता शिक्षकों की ओर से सीनियर एडवाेकेट राजीव श्रीवास्तव व अन्य अधिवक्ताओं ने कोर्ट में दलील देते हुए कहा, राज्य सरकार की यह नीति ‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009’ (RTE Act) की धारा 25 के खिलाफ है, जो हर स्कूल में एक निश्चित छात्र-शिक्षक अनुपात बनाए रखने का आदेश देती है । इस प्रक्रिया से कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी हो जाएगी और क्लस्टर शैक्षणिक समन्वयकों CAC व प्रधान पाठकों को भी सामान्य शिक्षकों की तरह पूल में शामिल करना अनुचित है। राज्य सरकार का यह निर्देश संविधान के अनुच्छेद 166 के तहत विधिवत रूप से जारी नहीं किए गए हैं।
राज्य सरकार की ओर से पैरवी करते हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता वायएस ठाकुर ने कहा, राज्य सरकार की मंशा ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों के उन स्कूलों में शिक्षकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है जो वर्तमान में शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहे हैं। यह कदम व्यापक जनहित और शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए उठाया गया है।
मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद जस्टिस बीडी गुरु के सिंगल बेंच ने 23 जून 2026 को फैसला सुरक्षित रख लिया था। आज बुधवार 2 जुलाई 2026 को फैसला सुनाते हुए सरकार की नीति पर मुहर लगा दी। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, सरकारी नीतियों, विशेषकर शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण और उनके स्थानांतरण जैसे मामलों में अदालत को संयम बरतना चाहिए। सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों के तर्कसंगत वितरण और पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए ‘सद्भावना’ से काम किया है।
युक्तियुक्तकरण के निर्देशों और उसके तहत की गई सभी अनुवर्ती कार्रवाइयों को चुनौती देने वाली दलीलाें को योग्यताहीन करार देते हुए सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है।