अमित बघेल की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, बलौदाबाजार हिंसा मामले में राज्य सरकार से मांगा जवाब

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित बलौदाबाजार कलेक्टोरेट आगजनी और हिंसा मामले में जेल में बंद अमित बघेल ने जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के फैसले के खिलाफ विशेष अनुमति याचिका SLP दायर की है। एसएलपी पर सुनवाई करते हुए राज्य सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जस्टिस केवी. विश्वनाथन और जस्टिस चंद्रशेखर की डिवीजन बेंच ने इस मामले को पहले से लंबित एक अन्य संबंधित याचिका के साथ मर्ज करने का आदेश दिया है। अब दोनों याचिकाओं पर एकसाथ सुनवाई होगी।

बता दें, शुक्रवार 3 जुलाई 2026 को हुई सुनवाई में याचिकाकर्ता की ओर से लॉ एसोसिएट्स और अधिवक्ताओं की टीम ने पैरवी की। शीर्ष अदालत ने मामले की गंभीरता और कानूनी पहलुओं को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को ‘दस्ती नोटिस’ (पर्सनल कूरियर के जरिए तामीली) की भी अनुमति दी है।

यह पूरा विवाद 10 जून 2024 को बलौदाबाजार जिले में हुई हिंसा से जुड़ा है। गिरौदपुरी धाम के अमर गुफा में सतनामी समाज के पवित्र प्रतीक ‘जैतखाम’ को तोड़े जाने के विरोध में दशहरा मैदान, बलौदाबाजार में लगभग 7,000 से 8,000 लोग एकत्र हुए थे। उग्र भीड़ ने एक आपराधिक साजिश के तहत पुलिस बल पर लाठियों, पत्थरों और लोहे की रॉड से हमला कर दिया। इसके बाद भीड़ ने कलेक्टोरेट और पुलिस अधीक्षक कार्यालय परिसर में खड़ी सैकड़ों मोटर साइकिल, कार, और सरकारी वाहनों को फूंक दिया और कलेक्टोरेट की मुख्य इमारत को आग के हवाले कर दिया। इस हिंसा में सरकारी संपत्ति को लगभग 13 से 15 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था।

अमित बघेल ने कोर्ट में दलील दी थी कि घटना के वक्त (दोपहर 12 से 3 बजे) वे अपनी पत्नी के एक रजिस्ट्री कार्य के सिलसिले में रजिस्ट्रार कार्यालय में मौजूद थे। लेकिन हाई कोर्ट ने इसे यह कहते हुए खारिज कर दिया कि पेश किए गए दस्तावेजों में उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति कहीं दर्ज नहीं थी।

ममले की सुनवाई के बाद छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के जस्टिस एनके व्यास के सिंगल बेंच ने 19 मई 2026 को अमित बघेल, अजय यादव और दिनेश कुमार वर्मा की नियमित जमानत याचिकाओं को सामूहिक रूप से खारिज कर दिया था।

  • साइबर सेल और पुलिस अधिकारियों के बयानों और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के आधार पर कोर्ट ने माना कि अमित बघेल और अजय यादव भीड़ को भड़काने, नारे लगाने और आगजनी के लिए उकसाने वाले मुख्य सूत्रधार थे।
  • अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी अमित बघेल के खिलाफ 17 आपराधिक मामले और अजय यादव के खिलाफ 13 आपराधिक मामले पहले से दर्ज हैं।