हाई कोर्ट ने बकाया भरण-पोषण राशि पर जुर्माना लगाने वाले फैमिली कोर्ट के आदेश को किया खारिज

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा के सिंगल बेंच ने पारिवारिक विवाद से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा, यदि कोई महिला अपने पक्ष में पारित भरण-पोषण के आदेश का पालन कराने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाती है, तो उसे दंडित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने दुर्ग फैमिली कोर्ट द्वारा पीड़िता पर लगाए गए 6 हजार रुपये के जुर्माने के आदेश को रद्द कर दिया है।

छत्तीसगढ़ दुर्ग जिले के अकोली निवासी 30 वर्षीय पूनम जंघेल का विवाह 16 फरवरी 2020 को किशन जंघेल से हुआ था। शादी के बाद से ही ससुराल वालों ने दहेज की मांग को लेकर उन्हें प्रताड़ित किया। 6 सितंबर 2021 को पति ने घर से निकाल दिया। पीड़िता ने भरण-पोषण के लिए दुर्ग फैमिली कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें कोर्ट ने 6 अक्टूबर 2022 को पति को 1,000 प्रति माह भरण-पोषण देने का आदेश दिया। हालांकि, पति ने बकाया राशि जमा नहीं की। जब पीड़िता ने बकाया राशि की मांग की, तो फैमिली कोर्ट ने उसे 2,000 का जुर्माना लगाया। इसके बाद 29 जून 2026 को जब महिला ने दोबारा अपनी बात रखी, तो कोर्ट ने पुराना आदेश दोहराते हुए उस पर 4,000 का अतिरिक्त जुर्माना लगा दिया। फैमिली कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ पीड़िता ने अधिवक्ता अविनाश चंद साहू के माध्यम से हाई कोर्ट में आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दायर की।

हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान पति के अधिवक्ता ने बताया कि बकाया राशि चुका दी गई है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि पीड़िता को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए दंडित नहीं किया जा सकता। हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट को निर्देश दिया कि भरण-पोषण मामले का निपटारा एक माह में किया जाए।