केवल सेक्स वर्कर होने के आधार पर महिला के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई गलत: हाई कोर्ट

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बिलासपुर। बिलासपुर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने एक महत्वपूर्ण फैसले में वयस्क महिला के खिलाफ अनैतिक देह व्यापार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज एफआईआर और उससे जुड़े आपराधिक मामले को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि केवल सेक्स वर्कर होने के आधार पर किसी वयस्क महिला के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई नहीं की जा सकती। स्वेच्छा से किया गया सेक्स वर्क अपने आप में अपराध नहीं है और पुलिस को ऐसी महिलाओं को गिरफ्तार, प्रताड़ित या पीड़ित नहीं करना चाहिए।

छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने रायपुर के तेलीबांधा थाने में दर्ज एफआईआर, उसके आधार पर दाखिल चार्जशीट और JMFC रायपुर में लंबित आपराधिक प्रकरण को निरस्त कर दिया है।

याचिकाकर्ता महिला ने छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में याचिका दायर कर बताया, वह कथित पुलिस कार्रवाई के समय रायपुर के होटल हयात में मौजूद ही नहीं थी। महिला ने आरोप लगाते हुए कहा, पुलिस ने बाद में उसे थाने बुलाया और मामले में झूठा फंसा दिया। उसे गिरफ्तार भी किया गया था और बाद में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, रायपुर ने जमानत दे दी थी।

याचिकाकर्ता ने बताया, पुलिस ने उसे भरोसा दिलाया था कि उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल नहीं की जाएगी, लेकिन बाद में उसके और अन्य आरोपियों के खिलाफ चालान पेश कर दिया गया।

याचिका की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई। डिवीजन बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि सेक्स वर्कर को कानून का समान संरक्षण प्राप्त है। यदि महिला वयस्क है और अपनी सहमति से सेक्स वर्क में शामिल है तो पुलिस को उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई से बचना चाहिए।

हाई कोर्ट ने पाया कि मामले में याचिकाकर्ता ने होटल हयात में अपनी मौजूदगी से ही इंकार किया है। जांच में ऐसा कोई विशिष्ट आरोप या सामग्री भी सामने नहीं आई, जिससे यह साबित हो कि उसने अनैतिक देह व्यापार निवारण अधिनियम की धारा 3, 4, 5 और 7 के तहत स्वतंत्र रूप से कोई अपराध किया हो। कोर्ट ने कहा कि केवल उसके सेक्स वर्कर होने के आधार पर आपराधिक कार्यवाही जारी रखना सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के विपरीत होगा।

डिवीजन बेंच ने माना कि याचिकाकर्ता के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। कोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए एफआईआर, चार्जशीट और जेएमएफसी रायपुर में लंबित आपराधिक प्रकरण को निरस्त कर दिया है।

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