बिलासपुर में गैस एजेंसी पर बड़ी कार्रवाई, 939 सिलेंडर जब्त; OTP लेकर ब्लैक में बेचने का आरोप

gas cylinder

बिलासपुर : सरकारी नियमों की अनदेखी कर घरेलू गैस सिलेंडरों की कथित कालाबाजारी के मामले में सोमवार को गैस एजेंसी संचालक के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई। उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर नहीं मिलने की लगातार शिकायतों के बाद खाद्य विभाग, राजस्व विभाग और ऑयल कंपनी के अधिकारियों की संयुक्त टीम ने एजेंसी में छापेमारी की। जांच के दौरान कुल 939 गैस सिलेंडर जब्त किए गए।

बालाजी गैस एजेंसी के संचालक कृष्ण कुमार शालरका के खिलाफ उपभोक्ताओं की ओर से लगातार शिकायतें मिल रही थीं। खाद्य विभाग के कॉल सेंटर और CM हेल्पलाइन 1076 पर भी कई शिकायतें दर्ज हुई थीं। इसके बाद कलेक्टर संजय अग्रवाल ने मामले की जांच के लिए संयुक्त टीम गठित की।

टीम में तहसीलदार प्रकाश साहू, सहायक खाद्य अधिकारी अजय मौर्य और विनीता दास, खाद्य निरीक्षक वर्षा सिंह, मंगेश कांत, ललिता शर्मा, आशीष दीवान, वसुधा राजपूत और इंडेन गैस के अधिकारी पंकज छेतिजा शामिल थे।

गैस गोदाम के भौतिक सत्यापन के दौरान ऑनलाइन रिकॉर्ड और मौके पर मौजूद वास्तविक स्टॉक में बड़ा अंतर सामने आया। जांच में रिकॉर्ड की तुलना करने पर 412 भरे हुए घरेलू गैस सिलेंडर कम मिले, जबकि 14 खाली सिलेंडर अतिरिक्त पाए गए।

स्टॉक में गड़बड़ी सामने आने के बाद टीम ने मौके पर मौजूद 452 भरे और 487 खाली सिलेंडर जब्त कर लिए। इस तरह कुल 939 सिलेंडर कार्रवाई के दौरान जब्त किए गए। जांच टीम ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी है।

जांच में एजेंसी की कार्यप्रणाली को लेकर भी कई शिकायतें सामने आईं। आरोप है कि उपभोक्ता गैस सिलेंडर बुक कराने के बाद छह से सात दिनों तक डिलीवरी का इंतजार करते रहते थे। अब यह भी जांच की जा रही है कि डिलीवरी से संबंधित प्रक्रिया पूरी करने के बाद एजेंसी संचालक सिलेंडरों को कहां खपाता था।

जांच के दौरान मौके पर मौजूद उपभोक्ताओं के बयान भी दर्ज किए गए। कई ग्राहकों ने आरोप लगाया कि बुकिंग के बाद एजेंसी कर्मचारी उनसे OTP लेकर डिलीवरी ऑथेंटिकेशन से जुड़ी प्रक्रिया पूरी कर लेते थे, लेकिन उन्हें सिलेंडर उपलब्ध नहीं कराया जाता था।

ग्राहकों के एजेंसी पहुंचने पर कर्मचारियों द्वारा अलग-अलग कारण बताकर उन्हें वापस भेजने का आरोप भी लगाया गया। उपभोक्ताओं का दावा है कि उनका OTP लेने के बाद उनके हिस्से के सिलेंडर दूसरे लोगों को कथित तौर पर लगभग दोगुनी कीमत पर ब्लैक में बेच दिए जाते थे।

फिलहाल मामले की जांच जारी है। स्टॉक में मिली अनियमितताओं और उपभोक्ताओं के आरोपों के आधार पर विभाग आगे की कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

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