बेमेतरा में ओपन जेल के संचालन में देरी पर हाई कोर्ट सख्त, सरकार से मांगी प्रगति रिपोर्ट

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बेमेतरा : बेमेतरा जिले के ग्राम पथर्रा में तैयार की गई ओपन जेल के संचालन को लेकर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को जरूरी व्यवस्थाएं जल्द पूरी करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल जेल भवन तैयार होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्टाफ, सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था पूरी होने के बाद ही इसे निर्धारित नियमों के अनुसार शुरू किया जाए।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने शिवराज सिंह बनाम छत्तीसगढ़ शासन मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से ओपन जेल की तैयारियों को लेकर प्रगति रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने जेल एवं सुधारात्मक सेवाओं के महानिदेशक को अक्टूबर 2026 में नया शपथपत्र दाखिल कर अब तक हुई तैयारियों की विस्तृत जानकारी देने के निर्देश दिए हैं।

हाई कोर्ट के 13 जुलाई 2026 के आदेश के बाद राज्य सरकार ने 14 जुलाई को बेमेतरा के पथर्रा गांव में ओपन जेल की औपचारिक स्थापना की थी। इसके बाद 13 अगस्त 2026 को छत्तीसगढ़ ओपन जेल (संचालन एवं प्रबंधन) नियम, 2026 अधिसूचित किए गए। इन नियमों में कैदियों के चयन, पात्रता, स्थानांतरण, पैरोल, अवकाश, समिति गठन और जेल प्रबंधन से संबंधित प्रावधान निर्धारित किए गए हैं।

सरकार का उद्देश्य ऐसे पात्र कैदियों को नियंत्रित स्वतंत्रता के साथ समाज की मुख्यधारा में लौटने का अवसर देना है, जिनका आचरण अच्छा रहा है और जो सुधार की प्रक्रिया में आगे बढ़ चुके हैं।

ओपन जेल के संचालन के लिए जेल विभाग ने 48 पदों के सृजन और सीधी भर्ती का प्रस्ताव शासन को भेजा है। इसमें प्रभारी जेल अधीक्षक समेत अन्य आवश्यक पद शामिल हैं। हाई कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं में तेजी लाने पर जोर दिया है।

ओपन जेल में कैदियों के सुधार और पुनर्वास को प्राथमिकता दी जाएगी। यहां उन्हें कौशल विकास, रोजगार प्रशिक्षण और स्वरोजगार से जोड़ने की योजना है। इसके लिए जन शिक्षण संस्थान, रायपुर के साथ कौशल प्रशिक्षण को लेकर समझौता किया गया है। वहीं रिहाई के बाद कैदियों को स्वरोजगार शुरू करने में आर्थिक मदद देने के उद्देश्य से इंडियन ओवरसीज बैंक के साथ भी एमओयू किया गया है।

जेल की बाहरी सुरक्षा के लिए छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (CAF) की एक कंपनी तैनात करने की मांग की गई है। जेल विभाग ने इसके लिए पुलिस मुख्यालय से कई बार पत्राचार किया है। हालांकि माओवादी प्रभावित क्षेत्रों और कानून-व्यवस्था की ड्यूटी में बल की व्यस्तता के कारण पुलिस मुख्यालय ने तत्काल कंपनी उपलब्ध कराने में असमर्थता जताई थी। इसके बाद जेल विभाग ने 14 जुलाई, 5 अगस्त और 14 अगस्त को दोबारा CAF कंपनी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।

नियम लागू होने के बाद केंद्रीय जेल अधीक्षकों को पात्र कैदियों की पहचान कर उनके आवेदन भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं। ऐसे कैदियों को ओपन जेल में रखने की योजना है, जिनका व्यवहार अच्छा रहा हो और जो सुधार की प्रक्रिया में आगे बढ़ चुके हों।

हाई कोर्ट ने माना कि ओपन जेल शुरू करने की दिशा में राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, लेकिन स्टाफ और सुरक्षा व्यवस्था अभी पूरी नहीं हुई है। कोर्ट ने इन सभी लंबित प्रक्रियाओं को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई अक्टूबर 2026 में होगी, जिसमें राज्य सरकार को ओपन जेल की प्रगति रिपोर्ट पेश करनी होगी।