आय से अधिक संपत्ति मामले में पूर्व DEO सुभाष गंजीर दोषी, 4 साल की सश्रम कैद

badi-khabar

दंतेवाड़ा : दंतेवाड़ा के तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) सुभाष गंजीर को आय से अधिक संपत्ति के मामले में विशेष अदालत ने दोषी ठहराया है। अदालत ने भ्रष्टाचार के इस मामले में उन्हें 4 साल के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई है। सरकारी पद पर रहते हुए ज्ञात आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों की जांच के बाद यह मामला अदालत पहुंचा था। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अब पूर्व DEO को जेल की सजा मिली है।

सुभाष गंजीर के खिलाफ वर्ष 2017 में आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायत दर्ज हुई थी। शिकायत के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने उनके ठिकानों पर छापेमारी की। तलाशी के दौरान नकदी, सोने-चांदी के आभूषण और संपत्तियों से जुड़े कई दस्तावेज बरामद किए गए।

जांच एजेंसियों ने बरामद संपत्ति और दस्तावेजों का मिलान उनकी घोषित तथा ज्ञात आय के स्रोतों से किया। जांच आगे बढ़ने के साथ मामला गंभीर होता गया।

ACB की कार्रवाई के दौरान करीब 8.71 लाख रुपए नकद बरामद किए गए थे। इसके अलावा लगभग 500 ग्राम सोना और अन्य आभूषण भी मिले। तलाशी में करीब 40 संपत्तियों और तीन मकानों से जुड़े दस्तावेज भी जांच एजेंसी को मिले थे।

इसके बाद जांच का मुख्य बिंदु यह रहा कि सुभाष गंजीर की वैध आय के मुकाबले उनके पास इतनी बड़ी मात्रा में संपत्ति और नकदी कहां से आई।

छापेमारी और जांच के बाद वर्ष 2018 में ACB ने सुभाष गंजीर को गिरफ्तार किया था। इसके बाद मामला जिला एवं सत्र न्यायालय, दंतेवाड़ा पहुंचा। उन पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू की गई।

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में दस्तावेज, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य पेश किए। जांच एजेंसी ने संपत्तियों और बरामद सामान का हिसाब अधिकारी की ज्ञात आय से मिलाए जाने की बात कही।

अदालत ने अभियोजन की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहियों का परीक्षण करने के बाद सुभाष गंजीर को दोषी करार दिया।

दोष सिद्ध होने के बाद विशेष अदालत ने पूर्व DEO सुभाष गंजीर को 4 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही 10 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया।

आय से अधिक संपत्ति के मामले में आया यह फैसला सरकारी अधिकारियों की अवैध संपत्ति पर कार्रवाई के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यह पूरा मामला वर्ष 2017 में शिकायत सामने आने के बाद शुरू हुआ था। इसके बाद ACB-EOW की छापेमारी, 2018 में गिरफ्तारी और लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अब अदालत ने दोषसिद्धि करते हुए सजा सुनाई है।

यह मामला इस बात को भी रेखांकित करता है कि सरकारी पद पर रहते हुए ज्ञात आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों की जांच के बाद मामला अदालत में दोषसिद्धि तक पहुंच सकता है।