हसदेव के तारा कोल ब्लॉक पर बवाल, अडानी समूह से जुड़ी कंपनी को आवंटन पर कांग्रेस ने उठाए सवाल

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हसदेव अरण्य : छत्तीसगढ़ के जैव-विविधता से समृद्ध हसदेव अरण्य क्षेत्र में स्थित तारा कोल ब्लॉक की हालिया नीलामी को लेकर सियासी और पर्यावरणीय विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। तारा कोल ब्लॉक का आवंटन अडानी समूह से जुड़ी कंपनी को किए जाने पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार ने हसदेव अरण्य जैसे संवेदनशील वन क्षेत्र को अडानी समूह के हवाले कर दिया है।

केंद्र सरकार की वाणिज्यिक कोयला खनन के लिए आयोजित नीलामी में ‘CG Syn-Gas and Chemicals Limited’ ने तारा कोल ब्लॉक हासिल किया है। यह कंपनी मुंद्रा सिनएनर्जी लिमिटेड और अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है।

कंपनी ने 37.50 प्रतिशत की उच्चतम राजस्व हिस्सेदारी की बोली लगाकर ब्लॉक अपने नाम किया। जयराम रमेश ने इस मामले में तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार द्वारा केंद्र को भेजे गए पत्र का भी हवाला दिया है। उस पत्र में तारा समेत हसदेव क्षेत्र के सभी कोल ब्लॉकों को नीलामी से बाहर रखने की मांग की गई थी।

कांग्रेस का आरोप है कि छत्तीसगढ़ में सरकार बदलने के करीब तीन साल बाद तारा कोल ब्लॉक अडानी समूह से जुड़ी कंपनी को आवंटित कर दिया गया।

तारा कोल ब्लॉक की नीलामी को लेकर कांग्रेस ने पुराने सरकारी दस्तावेजों और विधानसभा के फैसले का हवाला देते हुए सवाल उठाए हैं।

26 जुलाई 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा ने सर्वसम्मति से हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोयला ब्लॉकों के आवंटन को रद्द करने की मांग वाला अशासकीय संकल्प पारित किया था।

इसके बाद 23 जून 2023 को छत्तीसगढ़ शासन के खनिज साधन विभाग ने केंद्र सरकार को पत्र भेजकर तारा समेत हसदेव क्षेत्र के 9 कोल ब्लॉकों को नीलामी प्रक्रिया से बाहर रखने की सिफारिश की थी।

राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में शपथ पत्र दाखिल कर हसदेव अरण्य क्षेत्र में नए खनन का विरोध किया था। इसके बाद 19 अक्टूबर 2023 को केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने तारा समेत 40 कोल ब्लॉकों को नीलामी प्रक्रिया से अलग कर दिया था।

अब तारा कोल ब्लॉक के दोबारा नीलामी प्रक्रिया में आने और इसके अडानी समूह से जुड़ी कंपनी को मिलने के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं।

तारा कोल ब्लॉक करीब 5,000 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें 4,000 एकड़ से ज्यादा हिस्सा घने जंगल के अंतर्गत बताया जा रहा है। खनन शुरू होने की स्थिति में करीब 10 लाख पेड़ों की कटाई का खतरा बताया जा रहा है।

यह इलाका लेमरू हाथी रिजर्व से भी सटा हुआ है। ऐसे में पर्यावरणविदों और स्थानीय लोगों को हाथियों समेत कई वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और उनके आवागमन के मार्ग प्रभावित होने की आशंका है।

हसदेव अरण्य क्षेत्र में आदिवासी और ग्रामीण समुदाय पिछले करीब 15 वर्षों से कोयला खनन के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने कई बार ग्राम सभा के प्रस्तावों और विरोध प्रदर्शनों के जरिए जंगल, पर्यावरण और अपनी आजीविका की रक्षा की मांग उठाई है।

तारा कोल ब्लॉक के नए आवंटन के बाद हसदेव बचाओ आंदोलन ने भी विरोध तेज कर दिया है। इससे आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव के साथ-साथ पर्यावरण और आदिवासी अधिकारों को लेकर बहस और बढ़ने की संभावना है।