कोरबा में 25 सितंबर की जनसुनवाई से पहले भू-विस्थापितों का मोर्चा, मुआवजा-रोजगार समेत उठाईं कई मांगें

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कोरबा। भिलाई खुर्द और आसपास के प्रभावित गांवों के ग्रामीणों ने 25 सितंबर 2026 को प्रस्तावित पर्यावरणीय जनसुनवाई से पहले वर्षों से लंबित मांगों के निराकरण की मांग की है। इस संबंध में एसईसीएल मानिकपुर प्रभावित ग्राम (भू-विस्थापित) समिति, भिलाई खुर्द के नेतृत्व में ग्रामीणों ने कलेक्टर कोरबा को ज्ञापन सौंपा।

ग्रामीणों ने ज्ञापन में स्पष्ट किया कि वे क्षेत्र के विकास या परियोजना के विरोध में नहीं हैं, लेकिन विकास की प्रक्रिया में उन परिवारों के अधिकारों और हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए, जिनकी जमीन, आजीविका और सामाजिक जीवन परियोजना के कारण प्रभावित हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार, उचित मुआवजा, रोजगार, पुनर्वास और बुनियादी सुविधाओं को लेकर वे लंबे समय से प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन के सामने अपनी मांगें रखते आ रहे हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि इससे पहले भी पर्यावरणीय जनसुनवाई की तारीख तय की गई थी, लेकिन प्रभावित ग्रामीणों और भू-विस्थापित संगठन ने लंबित मांगों का समाधान किए बिना जनसुनवाई कराने पर आपत्ति जताई थी। विरोध और आपत्तियों के बाद जनसुनवाई स्थगित कर दी गई थी। अब दोबारा 25 सितंबर की तारीख निर्धारित की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस बार भी बिना ठोस समाधान के जनसुनवाई कराई गई तो प्रभावित परिवारों में असंतोष और बढ़ सकता है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि जनसुनवाई से पहले प्रभावित परिवारों के साथ बैठक कर उनकी समस्याओं पर बिंदुवार चर्चा की जाए और प्रत्येक मांग के समाधान के लिए समयसीमा तय की जाए। उन्होंने विशेष रूप से 1963-64 में अधिग्रहित जमीन के उन किसानों को भूमि के बदले एसईसीएल में विस्थापन रोजगार देने की मांग की है, जिन्हें अब तक रोजगार नहीं मिला है।

इसके अलावा 1963-64 में अधिग्रहित भूमि के जिन किसानों को अभी तक मुआवजा नहीं मिला है, उन्हें तत्काल भुगतान करने की मांग की गई है। ग्रामीणों ने भूमि और संपत्तियों का उचित एवं पारदर्शी मुआवजा, प्रभावित परिवारों के पात्र युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता और सम्मानजनक पुनर्वास की भी मांग रखी है।

प्रभावित गांवों में सड़क, पेयजल, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है। ग्रामीणों ने प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन से जनसुनवाई से पहले उनके साथ सार्थक संवाद स्थापित कर समस्याओं का समाधान करने का आग्रह किया है।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर इस बार भी ठोस पहल नहीं हुई तो वे आंदोलन तेज करेंगे। उन्होंने कहा कि मांगों के लिए वे जेल जाने तक के लिए तैयार हैं और जनसुनवाई का पुरजोर विरोध किया जाएगा।