बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में STF और जिला विशेष शाखा की संयुक्त टीम ने अतीक हुसैन नाम के एक व्यक्ति को पकड़ा है। पुलिस के अनुसार, वह मूल रूप से बांग्लादेश के नारायणगंज जिले का रहने वाला है और वर्ष 2005 में भारत आया था। पुलिस का दावा है कि वह करीब 19 वर्षों से बिलासपुर में रह रहा था और उसके पास भारतीय पहचान से जुड़े कई दस्तावेज मिले हैं।
पुलिस के मुताबिक, अतीक हुसैन को 24 सितंबर की सुबह सरकंडा क्षेत्र की सूर्या विहार कॉलोनी स्थित उसके किराए के मकान से पकड़ा गया। इससे पहले वह सिरगिट्टी क्षेत्र में संदिग्ध लोगों की जांच के दौरान पुलिस की कार्रवाई के बीच वहां से निकल गया था। इसके बाद STF ने उसकी तलाश शुरू की और उसके संभावित ठिकानों पर निगरानी रखी।
पूछताछ में अतीक ने पुलिस को अपना मूल पता बांग्लादेश के नारायणगंज जिले का बताया। पुलिस के अनुसार, वह वर्ष 2005 में बांग्लादेश से भारत आया था और 2005 से 2007 के बीच तमिलनाडु में रहा। इसके बाद वह बिलासपुर पहुंचा और यहां रहने लगा।
पुलिस के मुताबिक, बिलासपुर में वह सीपत स्थित NTPC परिसर में एक निजी कंपनी के माध्यम से लिफ्ट मेंटेनेंस का काम करता था। रिपोर्टों के अनुसार, वह करीब 19 वर्षों तक यहां रहकर काम करता रहा।
तलाशी के दौरान पुलिस ने उसके पास से भारतीय पासपोर्ट, आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस, निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र और नौवीं कक्षा की अंकसूची सहित कई दस्तावेज बरामद किए। पुलिस का कहना है कि पूछताछ में अतीक ने इन दस्तावेजों को गलत तरीके से बनवाने की बात स्वीकार की है। हालांकि, सभी दस्तावेजों की वैधता और उन्हें जारी किए जाने की प्रक्रिया की जांच की जा रही है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन दस्तावेजों को तैयार कराने में किन लोगों की भूमिका थी और दस्तावेज किस प्रक्रिया के जरिए हासिल किए गए। साथ ही भारत में उसके प्रवेश से लेकर बिलासपुर में रहने तक की गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।
पुलिस के अनुसार, अतीक को फिलहाल रायपुर स्थित होल्डिंग सेंटर भेजा जा रहा है और बांग्लादेश डिपोर्टेशन की प्रक्रिया शुरू की गई है। संबंधित अधिकारियों और बांग्लादेशी दूतावास को भी मामले की जानकारी दिए जाने की बात सामने आई है।
मामले में आगे की कार्रवाई दस्तावेजों के सत्यापन और पुलिस जांच के आधार पर होगी। जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि भारतीय पहचान संबंधी दस्तावेज किस तरह तैयार हुए और इसमें किसी अन्य व्यक्ति या नेटवर्क की भूमिका थी या नहीं।