चक्रवात ‘अर्नब’ का असर, छत्तीसगढ़ में झमाझम बारिश से बिगड़े हालात

बस्तर को जमकर भीगा रहा मानसून
बस्तर में चक्रवात के असर से जन-जीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए गरियाबंद, कांकेर, कोण्डागांव और धमतरी जैसे जिलों के स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई है। आपदा टीमों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं।
जगदलपुर में बाढ़ जैसे हालात
लगातार हो रही बारिश के चलते इंद्रावती नदी के सभी सहायक नाले उफान पर हैं। गोरियाबहार नाला भरने से दर्जनों गांवों का संपर्क टूट गया है। तिरिया, पोटनार, जगदलपुर समेत कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। बारिश का असर वन विभाग के कार्यालय पर भी पड़ा है। कार्यालय की सभी शाखाओं में पानी भर गया है, जिससे कई रिकॉर्ड पूरी तरह भीग गए हैं। अमागुड़ा इलाके में हाईवे से लगी निचली बस्ती पूरी तरह जलमग्न हो गई है. लोग घरों से सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा रहा है।
इंद्रावती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से नदी किनारे स्थित तोमर फार्म हाउस पूरी तरह जलमग्न हो गया है। फार्म हाउस में 5 लोगों के फंसे होने की जानकारी मिलते ही SDRF की टीम उन्हें रेस्क्यू करने के लिए मौके पर पहुंची। बताया जा रहा है कि यह फार्म हाउस इंद्रावती नदी के नए पुल के किनारे स्थित है। बढ़ते जलस्तर के चलते फार्म हाउस परिसर में पानी भर गया है, वहीं वहां खड़ा एक ट्रक भी पूरी तरह पानी में डूबा हुआ नजर आ रहा है।
कांकेर में दूध नदी उफान पर, स्कूलों में छुट्टी घोषित
कांकेर जिले में पिछले 48 घंटों से लगातार बारिश हो रही है. बारिश के चलते नदी-नाले उफान पर हैं और कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है। आमाबेड़ा, कुरना समेत अंदरूनी इलाकों में नदी-नालों का जलस्तर बढ़ गया है. भारी बारिश को देखते हुए प्रशासन ने स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी है और लोगों को सतर्क रहने की हिदायत दी है।
बारिश के दौरान जगह-जगह सड़क पर पेड़ गिरने से आवागमन प्रभावित हुआ। पुलिस और यातायात विभाग की टीम ने देर रात पेड़ों को हटाया। दूध नदी का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है। जलस्तर बढ़ने की सूचना के बाद मस्जिद से अलाउंस कराकर लोगों को आगाह किया गया।
कोंडागांव में पुल-पुलियों के ऊपर से बह रहा पानी, कई गांवों का टूटा संपर्क
कोंडागांव जिले में पिछले तीन दिनों से लगातार बारिश हो रही है। इसके चलते नदी-नाले उफान पर हैं। कई ग्रामीण इलाकों में सड़कें जलमग्न हो गई हैं और पुल-पुलियों के ऊपर पानी आने से कई गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क कट गया है. सुरक्षा को देखते हुए 25 सितंबर को जिले के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। लगातार बारिश को देखते हुए प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में बचाव और राहत टीमों को भेजा है। टीमें जलभराव और बढ़े हुए जलस्तर वाले इलाकों का जायजा ले रही हैं। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है।
सुकमा में बाढ़ जैसे हालात, खाली कराई जा रहीं निचली बस्तियां
सुकमा जिले में लगातार बारिश से बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। कोंटा इलाके की निचली बस्तियों को खाली कराया जा रहा है. डोंडरा पंचायत में कई घरों को खाली कराया जा रहा है, जहां जनपद पंचायत की टीम मौके पर मौजूद है। छिंदगढ़ क्षेत्र के ओलेर, नेतानार, किकिरपाल, तालनार, गुम्मा और गंजेनार समेत कई इलाकों में बाढ़ के हालात हैं। वहीं, दोरनापाल-कोंटा और दोरनापाल-सुकमा के बीच नेशनल हाईवे पर कई जगह पानी भरने से जाम की स्थिति बनी हुई है। पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर मौजूद हैं।
सिकासार-गंगरेल बांध और रुद्री बैराज से छोड़ा गया पानी
गरियाबंद जिले के देवभोग और अमलीपदर तहसील में पिछले तीन दिनों से लगातार बारिश हो रही है। तेल नदी, सुख तेल नदी समेत सभी बरसाती नाले उफान पर हैं। सिकासार बांध में 87 प्रतिशत जलभराव के चलते सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 15,500 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। कई इलाकों में घरों में पानी घुसना शुरू हो गया है. आधी रात से लोग रतजगा कर घर का सामान सुरक्षित बचाने की मशक्कत कर रहे हैं। बेलाट नाला में जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जबकि कुछ बच्चे खतरे के बीच नहाते नजर आए। हजारों एकड़ खेत जलमग्न होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। भारी बारिश को देखते हुए जिला प्रशासन ने आज से शुरू होने वाली त्रैमासिक परीक्षाएं रद्द कर दी हैं। पिछले 24 घंटे में 200 मिमी से ज्यादा बारिश दर्ज हुई है, जिसने लोगों को करीब 10 साल पहले आई बाढ़ की याद दिला दी है।
धमतरी में लगातार बारिश के चलते जलाशय लबालब हो गए हैं और प्रशासन अलर्ट मोड पर है. गंगरेल जलाशय 98.14 प्रतिशत भर चुका है, जहां रिकॉर्ड 64,117 क्यूसेक पानी की आवक हो रही है। मुरुमसिल्ली जलाशय 100 प्रतिशत, दुधावा 97.21 प्रतिशत और सोढ़ुर जलाशय 88.18 प्रतिशत भर चुका है। बढ़ते जलस्तर को देखते हुए गंगरेल बांध के 10 गेट खोल दिए गए हैं, जिनसे कुल 54,950 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। इसमें रुद्री बैराज से 6,000 क्यूसेक पानी नहर में और 48,950 क्यूसेक पानी महानदी में छोड़ा जा रहा है. जरूरत पड़ने पर पानी छोड़ने की मात्रा और बढ़ाई जा सकती है। इसके अलावा मुरुमसिल्ली से 7,286 क्यूसेक, दुधावा से 16,606 क्यूसेक और सोढ़ुर के 5 गेटों से 16,402 क्यूसेक पानी नदी में छोड़ा जा रहा है।
महानदी का जलस्तर बढ़ा
लगातार पानी छोड़े जाने से महानदी समेत आसपास के नदी-नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है और बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है. जिला प्रशासन ने महानदी किनारे बसे गांवों में अलर्ट जारी किया है और लोगों से नदी-नालों व जलभराव वाले क्षेत्रों के पास नहीं जाने की अपील की है. भारी बारिश के बीच जिले के सभी स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई है। जिन स्कूलों में त्रैमासिक परीक्षाएं शुरू हो चुकी थीं, उन्हें भी रद्द कर दिया गया है। स्थिति सामान्य होने के बाद परीक्षाओं को लेकर प्रशासन फैसला लेगा।
बालोद में लगातार बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त
बालोद जिले में लगातार हो रही बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. बारिश के चलते जिलेभर की नदियां, नाले और खेत-खलिहान लबालब हो गए हैं। सियादेवी वाटरफॉल भी पूरे शबाब पर है, जिसका नजारा देखने बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। रिकॉर्ड बारिश के चलते जिलेभर के स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई है। कई स्कूलों में छात्र पहुंच चुके थे, जिन्हें बाद में घर वापस भेज दिया गया। लगातार बारिश के कारण कई छोटे-छोटे नालों के ऊपर से पानी बह रहा है, जिससे कई जगहों पर आवागमन भी बाधित हो गया है।