महिला शिक्षिका से छेड़छाड़ के मामले में दोषी शिक्षक बर्खास्त, कोर्ट ने सुनाई थी एक साल की सजा

बिलासपुर। महिला शिक्षिका के साथ छेड़छाड़ और मारपीट के मामले में न्यायालय से दोषी करार दिए गए शिक्षक पर आखिरकार शिक्षा विभाग ने कार्रवाई कर दी है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) तखतपुर की अदालत से एक साल के सश्रम कारावास और जुर्माने की सजा मिलने के बाद संयुक्त संचालक (JD) शिक्षा, बिलासपुर संभाग ने शिक्षक विवेक गुप्ता को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर बर्खास्तगी का आदेश जारी किया गया है।
जिला शिक्षा अधिकारी बिलासपुर द्वारा 21 अक्टूबर 2026 को भेजे गए पत्र के आधार पर संयुक्त संचालक शिक्षा ने यह कार्रवाई की है। आदेश के मुताबिक, शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय बेलमुंडी, विकासखंड तखतपुर में पदस्थ उच्च वर्ग शिक्षक विवेक गुप्ता को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, तखतपुर ने 26 सितंबर 2026 को सुनाए गए फैसले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354 और 323 के तहत दोषी ठहराया था।
अदालत ने धारा 354 के तहत शिक्षक को एक वर्ष के सश्रम कारावास और 1,000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई थी। वहीं, धारा 323 के तहत भी 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया था।
आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 428 के तहत जारी प्रमाणपत्र के अनुसार शिक्षक 7 अगस्त 2018 से 9 अक्टूबर 2018 तक कुल दो महीने और दो दिन न्यायिक अभिरक्षा में रहा था।
शिक्षा विभाग ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम 10 (नौ) के तहत कार्रवाई करते हुए विवेक गुप्ता को 26 सितंबर 2026 से भूतलक्षी प्रभाव से सेवा से पदच्युत कर दिया है। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।
मामला 17 फरवरी 2018 का है। आरोप के मुताबिक, सुबह करीब 11:30 से दोपहर 12 बजे के बीच तखतपुर ब्लॉक के एक सरकारी स्कूल में महिला शिक्षिका के साथ यह घटना हुई थी।
पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि शिक्षक विवेक गुप्ता ने उनके साथ अभद्र व्यवहार करते हुए हाथ खींचा और छेड़छाड़ की। विरोध करने पर आरोपी ने उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की तथा उन्हें दीवार की ओर धक्का दे दिया। इस घटना में महिला शिक्षिका के सिर और चेहरे पर चोटें आई थीं।
शिकायत में पीड़िता ने तेजाब फेंकने और जान से मारने की धमकी दिए जाने का आरोप भी लगाया था। पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच के बाद प्रकरण न्यायालय में पेश किया था।
मामले के सामने आने के बाद शिक्षक का स्थानांतरण तखतपुर ब्लॉक के ही बेलमुंडी स्कूल में कर दिया गया था। इसके बाद न्यायालय में लंबे समय तक सुनवाई चली।
26 सितंबर 2026 को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ऋचा यादव की अदालत ने मामले में फैसला सुनाते हुए विवेक गुप्ता को दोषी ठहराया और एक वर्ष के सश्रम कारावास के साथ जुर्माने की सजा सुनाई।
अदालत के फैसले के बाद भी विभागीय कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे थे। अब संयुक्त संचालक शिक्षा की ओर से बर्खास्तगी आदेश जारी होने के बाद शिक्षक की सेवा समाप्त कर दी गई है।
सरकारी सेवा में कार्यरत किसी कर्मचारी को आपराधिक मामले में दोषी ठहराए जाने पर संबंधित सेवा नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे मामलों में सामान्य विभागीय जांच की प्रक्रिया से अलग विशेष प्रावधान भी लागू होते हैं।
हालांकि, केवल उच्च न्यायालय में अपील दायर कर देने से निचली अदालत का दोषसिद्धि संबंधी फैसला स्वतः समाप्त नहीं होता। दोषसिद्धि पर रोक या अन्य राहत के लिए उच्च न्यायालय का स्पष्ट आदेश आवश्यक होता है।
इस मामले में शिक्षा विभाग ने न्यायालय के फैसले के आधार पर शिक्षक को सेवा से पदच्युत करने का आदेश जारी कर दिया है।
