छत्तीसगढ़ में कलेक्टर बदलते ही पलटा फैसला! DMF के 160 विकास कार्य निरस्त, 8.32 करोड़ की वसूली के आदेश

पेंड्रा : छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) की राशि से स्वीकृत विकास कार्यों को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। पूर्व कलेक्टर के कार्यकाल में मंजूर किए गए 160 विकास कार्यों को वर्तमान जिला प्रशासन ने निरस्त कर दिया है। इन कार्यों के लिए पहली किश्त के रूप में जारी 8 करोड़ 32 लाख 48 हजार 70 रुपये भी वापस सरकारी खाते में जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं।
दरअसल, वित्तीय वर्ष 2026-27 में तत्कालीन कलेक्टर लीना मंडावी के कार्यकाल के दौरान DMF मद से 160 विकास कार्यों को प्रशासकीय स्वीकृति दी गई थी। इन सभी कार्यों की कुल अनुमानित लागत 17 करोड़ 46 लाख 92 हजार 166 रुपये थी। हालांकि, कलेक्टर विजय दयाराम के. के कार्यकाल में इन स्वीकृतियों की प्रक्रिया की समीक्षा की गई, जिसके बाद कई प्रक्रियागत अनियमितताओं का मामला सामने आया।
प्रशासनिक जांच में सामने आया कि DMF मद से विकास कार्यों को स्वीकृति देने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन जरूरी है। इसके तहत प्रस्ताव जिला प्रबंधकारिणी समिति के समक्ष प्रस्तुत करने के साथ ही शासी परिषद से अनुमोदन लेना भी आवश्यक होता है।
आरोप है कि इन 160 विकास कार्यों के लिए जरूरी समितियों की मंजूरी प्राप्त किए बिना ही प्रशासकीय स्वीकृतियां जारी कर दी गईं। इसके बावजूद संबंधित कार्यदायी एजेंसियों को पहली किश्त के रूप में करोड़ों रुपये का भुगतान भी कर दिया गया।
मामले में प्रक्रियागत खामियां सामने आने के बाद वर्तमान कलेक्टर विजय दयाराम के. ने खनिज साधन विभाग के सचिव पी. दयानंद को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की जानकारी दी थी।
इसके बाद जिला प्रशासन ने संबंधित कार्यदायी एजेंसियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। नोटिस पाने वाली एजेंसियों में जनपद पंचायत गौरेला, पेण्ड्रा और मरवाही, नगर पंचायत मरवाही, विद्युत यांत्रिकी संभाग बिलासपुर, क्रेडा, पशु चिकित्सा सेवाएं तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय शामिल थे।
एजेंसियों ने अपने जवाब में कहा कि DMF कार्यालय की ओर से प्रस्ताव मांगे जाने के बाद स्वीकृति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई थी। उन्होंने विकास कार्यों की आवश्यकता का भी हवाला दिया। हालांकि, निर्धारित समितियों से जरूरी अनुमोदन लिए बिना स्वीकृति जारी करने के संबंध में संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया जा सका।
शासन से मिले निर्देशों के बाद 26 अक्टूबर 2026 को जिला प्रबंधकारिणी समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में सभी 160 विकास कार्यों की स्वीकृतियों, संबंधित दस्तावेजों और कार्यदायी एजेंसियों से मिले जवाबों की विस्तार से समीक्षा की गई।
विचार-विमर्श के बाद निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन नहीं होने के आधार पर सभी 160 कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृतियां निरस्त करने का निर्णय लिया गया। साथ ही संबंधित एजेंसियों को पहले जारी की गई राशि सरकारी खाते में वापस जमा कराने के निर्देश दिए गए।
इस पूरे मामले में राशि का आंकड़ा भी काफी महत्वपूर्ण है।
- निरस्त किए गए विकास कार्य: 160
- कुल स्वीकृत लागत: 17 करोड़ 46 लाख 92 हजार 166 रुपये
- पहली किश्त के रूप में जारी राशि: 8 करोड़ 32 लाख 48 हजार 70 रुपये
- वसूली के निर्देश: 8.32 करोड़ रुपये से अधिक
अब संबंधित कार्यदायी एजेंसियों को जारी राशि सरकारी खाते में वापस जमा करानी होगी।
DMF की राशि का इस्तेमाल खनन प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए किया जाता है। इस फंड से पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और महिला एवं बाल विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम कराए जाते हैं।
ऐसे में 17 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले 160 विकास कार्यों का निरस्त होना कई सवाल खड़े करता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि स्वीकृतियां निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत जारी की गई थीं, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही किस स्तर पर तय होगी?
फिलहाल जिला प्रशासन ने सभी 160 कार्यों को निरस्त करते हुए जारी राशि की वापसी के निर्देश दिए हैं। हालांकि, इस मामले में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई होगी या नहीं, इस पर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
