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मैक्सी पहनने पर सास का ताना प्रताड़ना नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने क्यों कही ये बात…

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सास अगर बहू को मैक्सी पहनने के लिए ताना मारती है तो इसे प्रताड़ना नहीं माना जाएगा। मध्य प्रदेश की एक महिला ने केस दर्ज कराया था कि उसकी सास मैक्सी पहनने पर ताना मारती थीं। महिला की शादी 2007 में हुई थी। कोर्ट ने इस पर कहा कि आरोप बेहद आम किस्म का है, इसे प्रताड़ना नहीं मान सकते। कोर्ट ने कहा कि बिना सही ग्राउंड के केस चलाना आरोपी के साथ अन्याय होगा। महिला की सास और पति के भाई ने क्रिमिनल केस के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

मर्जी से छोड़ा था ससुराल

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में दहेज प्रताड़ना का जो आरोप लगाया गया है वह जनरल (बेहद आम सा) है। ऐसे में महिला की शिकायत पर चल रही क्रिमिनल कार्यवाही को खारिज की जाती है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अनिरुद्ध बोस की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि आरोप अस्पष्ट है। महिला के पति का भाई अलग शहर में रहते हैं और शिकायती से वह त्योहार आदि में ही मिले हैं। महिला शादी के बाद अपने ससुराल 2007 से लेकर 2009 तक ही रही। 2009 में अपनी मर्जी से ससुराल छोड़कर अपने मायके रहने चली गई।

तलाक के केस के बाद शिकायत

2013 में महिला ने तब शिकायत दर्ज कराई जब उसके पति ने उसके खिलाफ तलाक का केस दायर किया। पति के तलाक के केस के बाद महिला ने दहेज प्रताड़ना की शिकायत की। साथ ही अपने पति के भाई (जूडिशल ऑफिसर) के खिलाफ एक अज्ञात लेटर लिखकर शिकायत की थी और बाद में माना था कि उसी ने वह लेटर लिखा है। ऐसे में जाहिर होता है कि उसका अपने पति के भाई से व्यक्तिगत दुश्मनी थी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि महिला ने खुद अपना ससुराल छोड़ा था। तलाक का केस जब पति ने दर्ज कराया तब उसने ससुरालियों के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज कराया।

FIR और शिकायत में फैक्ट अलग-अलग

साथ ही एफआईआर में कहा था कि अपराध 2007 से लेकर 2013 के बीच हुआ था। जबकि शिकायत में जो तथ्य है उसमें 2009 तक प्रताड़ना की बात थी। सास पर उसने आरोप लगाया था कि उन्होंने मैक्सी पहनने के लिए ताना मारा, लेकिन यह प्रताड़ना नहीं है। इस मामले में प्रताड़ना का जो आरोप लगाया गया है उसमें यह तथ्य नहीं है कि कब किस तरह का प्रताड़ना हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तमाम परिस्थितियों को देखते हए आरोप मुक्कमल नहीं है। ऐसे में पहली नजर में केस नहीं बनता है।