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शादी के लिए लड़का देता है 20-500 रुपये, फिर लड़की 2 दिन रहती है उसके साथ, पसंद आया तो ठीक, नहीं तो…?

love affair

धमतरी| छत्तीसगढ़ के धमतरी में आज भी मामूली रकम के बदले लड़की ब्याहने की अनोखी प्रथा जिंदा है| गोरिया जाति में शादी पक्की करने के लिए वर पक्ष वधू पक्ष को 20 रुपये से 500 रुपये तक देता है| इसके बाद दो दिन लड़के-लड़की को घर में अकेला छोड़ दिया जाता है| इसके बाद दोनों शादी के लिए राजी हुए तो ही विवारह होता है| अगर वे राजी नहीं होते तो वर पक्ष को रुपये वापस लौटा दिए जाते हैं| हालांकि, अब इस जाति को लोग धीरे-धीरे बदलाव ला रहे हैं| समाज के लोगों ने बच्चों को स्कूल से जोड़ना शुरू कर दिया है| ताकि, बच्चों का भविष्य संवारा जा सके|

गौरतलब है कि, धमतरी जिला मुख्यालय से महज 5 किलोमीटर दूर भटगांव है| यहां ज्यादातर ओबीसी वर्ग और आदिवासी समाज के लोग रहते हैं| इनके अलावा गोरिया जाति के लोगों की संख्या भी यहां अच्छी-खासी है| इस जाति के लोग घुमंतू होते हैं| ये लोग सांप दिखाकर या भीख मांग जिंदगी गुजारते हैं| हैरानी की बात यह है कि इस जाति के लोगों को अपने इतिहास की ज्यादा जानकारी नहीं है| सरकार की सूची में भी इस जाती को अब तक जगह नहीं मिल सकी है|

हैरान करने वाली परंपरा
गोरिया जाति सबसे हैरान करने वाली परम्परा इनकी शादी है| इस समाज में रहने वाले लड़के के परिवार वाले कोई भी लड़की चुन लेते हैं| इसके बाद जब वे लड़की के परिवारवालों से बात करते हैं तो उनसे रकम मांगी जाती है| लड़के वाले इस रकम को चुकाते हैं| ये रकम 20 रुपये से लेकर 500 रुपये तक होती है| इस रकम को देने के बाद लड़का लड़की को दो दिन अपने साथ एक मकान में रखता है| दो दिन बाद तय होता है कि शादी होगी या नहीं| अगर शादी होती है तो वो रकम लड़की वालों की हो जाती है| लेकिन, अगर लड़की या लड़का इस शादी से इंकार करते हैं तो वधू पक्ष वर पक्ष को रकम वापस लौटा देते हैं| रिश्ते की बात उसी वक्त खत्म हो जाती है|

अब शिक्षित हो रहे इस जाति के बच्चे
दूसरी ओर, भटगांव स्कूल में करीब 22 साल से पढ़ा रहे शिक्षक दिनेश पांडेय बताते हैं कि आज से करीब 30 साल पहले सिर्फ 20 से 40 रुपये में दुल्हन मिल जाती थी| ये रकम आज बढ़ चुकी है| लेकिन, 500 रुपये से ज्यादा नहीं है| रुपयों से शादी तय करने की ये परंपरा आज भी जिंदा है| गोरिया जाति में अशिक्षा के कारण ये रिवाज अभी भी जिंदा है| लेकिन, धीरे-धीरे ये लोग अपने बच्चों को स्कूल से जोड़ रहे हैं| अब भटगांव के प्राइमरी से लेकर मिडिल स्कूल में बड़ी संख्या में गोरिया बच्चे पढ़ रहे है, शिक्षित हो रहे हैं| वे दूसरे समाज और जाति के बच्चों से दोस्ती और मेलजोल बढ़ा रहे हैं| समाज का यूवा आज स्मार्ट फोन चला रहा है| घर की छतों पर लगे डीटीएच बताते हैं कि समाज अब बदल रहा है|