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छत्तीसगढ़ में प्राचार्य प्रमोशन को हाईकोर्ट की मंजूरी, सभी याचिकाएं खारिज, राज्य शासन की नीति को बताया न्यायसंगत

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्राचार्य प्रमोशन नीति को वैध ठहराते हुए सभी याचिकाएं खारिज कर दी हैं। अब 2925 शिक्षकों की प्राचार्य पद पर पदोन्नति का रास्ता साफ हो गया है। सरकार जल्द पोस्टिंग आदेश जारी करेगी, जिससे 3500 स्कूलों में प्राचार्य की नियुक्ति हो सकेगी।

छत्तीसगढ़ में लंबे समय से विवादों में घिरे प्राचार्य प्रमोशन को लेकर आखिरकार हाईकोर्ट का बड़ा फैसला आ गया है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की प्रमोशन नीति को वैध ठहराते हुए सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है। कोर्ट के फैसले से अब प्रदेश के हजारों शिक्षकों की पदोन्नति का रास्ता साफ हो गया है।

शिक्षा विभाग ने 30 अप्रैल को प्राचार्य प्रमोशन की सूची जारी की थी, जिस पर हाईकोर्ट ने 1 मई को रोक लगा दी थी। अब अदालत ने वह स्थगन आदेश भी हटा दिया है, जिससे 2925 व्याख्याताओं की प्राचार्य पद पर नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। नए सत्र की शुरुआत से पहले यह फैसला शिक्षण व्यवस्था के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

बीएड योग्यता और वरिष्ठता का मुद्दा उठा था

याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट में यह दलील दी गई थी कि बीएड को अनिवार्य मानते हुए कई वरिष्ठ शिक्षकों को दरकिनार किया गया है। साथ ही, यह भी आरोप लगाया गया था कि कोर्ट के निर्देश के बाद भी कई जगहों पर शिक्षकों को जबरन ज्वाइन करा दिया गया, जो न्यायालय की अवमानना है।

हाईकोर्ट ने राज्य शासन की नीति को बताया न्यायसंगत

हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 11 जून से 16 जून तक लगातार सुनवाई के बाद निर्णय सुरक्षित रखा था, जिसे अब सुनाया गया है। अदालत ने कहा कि शासन द्वारा निर्धारित प्रमोशन नीति नियम 15 के तहत सही है और इसमें हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने नियमों में मामूली संशोधन का सुझाव दिया, लेकिन प्रमोशन आदेशों को वैध ठहराया।