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नेशनल हाईवे पर मवेशियों की मौत पर हाईकोर्ट नाराज, बोला-सही प्रयास करने में सरकार नाकाम

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बिलासपुर। नेशनल हाईवे पर सड़क हादसों में लगातार हो रही मवेशियों की मौत पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले को लेकर कई बार रोड मैप बनाने, मॉनिटरिंग करने सहित कई निर्देश दिए जा चुके हैं। इसके बाद भी शासन-प्रशासन इस दिशा में सही प्रयास करने में नाकाम है।

चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने एक बार फिर से प्रकरण में मुख्य सचिव और एनएचएआई के प्रोजेक्ट मैनेजर को शपथपत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

दरअसल, स्टेट और नेशनल हाईवे पर भारी वाहनों की चपेट में आने से मवेशियों की मौत का सिलसिला नहीं थम रहा है। पिछले 20 दिन के भीतर ही 3 तीन हादसों में 50 से अधिक गौवंशों की मौत हो चुकी है।
शासन को रोडमैप बनाकर सख्त कदम उठाने के दिए निर्देश

बता दें कि स्टेट और नेशनल हाईवे में मवेशियों की मौतों और बढ़ते सड़क हादसों पर हाईकोर्ट ने जनहित याचिका की सुनवाई कर रहा है। जिसमें मुख्य सचिव को मवेशियों को सड़कों को हटाने के लिए किए जा रहे उपायों पर शपथपत्र मांगा गया।

साथ ही हाईकोर्ट ने रोड मैप बनाने, मानिटरिंग करने सहित कई निर्देश दिए। लेकिन, अब तक किए गए सारे प्रयास विफल साबित हुए।

जानिए हाईकोर्ट का आदेश

पिछले साल 17 जुलाई को सिलपहरी के पास तेज रफ्तार वाहन ने 9 मवेशियों के कुचल दिया। इस घटना को हाईकोर्ट ने संज्ञान में लिया था, जिसके बाद मुख्य सचिव को जांच कर रिपोर्ट देने के लिए कहा था कि नेशनल हाईवे में मवेशियों की मौत के लिए जिम्मेदार कौन है? साल भर में अब तक दर्जन भर हादसों में 100 से अधिक मवेशियों की मौत हो चुकी है।

मवेशियों के गले में जियो टैगिंग लगाने की बनाई योजना

29 सितंबर 2024 राज्य सरकार ने बताया था कि मवेशियों को जियो टेगिंग वाला बेल्ट लगाने की योजना है। साथ ही सड़क पर बैठे मवेशियों की धरपकड़ की जा रही है।

प्रशासन ने इसके लिए अधिकारियों की ड्यूटी ही लगा दी है। पशुपालन विभाग ने मवेशियों के गले में जियो टेगिंग वाले बेल्ट भी लगाने शुरू कर दिए हैं।

हाईकोर्ट ने कहा था- समस्या दूर करने बनाएं रोडमैप

4 अक्टूबर 2024 को केस की सुनवाई करते हुए डिवीजन बेंच ने मुख्य सचिव को संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर समस्या तत्काल दूर करने रोडमैप बनाने को कहा था। साथ ही मुख्य सचिव और एनएचएआई को मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए थे।