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प्रदेश के 83 हजार जवानों के लिए सिर्फ 18 हजार स्टाफ क्वार्टर, जवानों को तत्काल आवास देने हाईकोर्ट का आदेश

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बिलासपुर। बिलासपुर हाईकोर्ट ने प्रदेश में पुलिस कर्मियों की आवासीय स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बी.डी. गुरु की डिवीजन बेंच ने बुधवार को हुई सुनवाई में कहा कि जीर्ण-शीर्ण मकानों को खाली कर नए मकान बनाए जाएं और जिन जवानों को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत मकान से बेघर किया गया है, उनके लिए तत्काल वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराया जाए।

कोर्ट में दाखिल शपथपत्र के मुताबिक, प्रदेश में पुलिस बल की कुल स्वीकृत संख्या 83,259 है, जबकि उपलब्ध क्वार्टर सिर्फ 18,396 हैं। यानी महज 22.09 प्रतिशत पुलिसकर्मी ही क्वार्टर पा सके हैं। बाकी जवान आज भी जर्जर और अनुपयुक्त मकानों में रहने को मजबूर हैं।

रायपुर के आमनाका स्थित 24 पुलिस क्वार्टरों को पीडब्ल्यूडी ने पूरी तरह मरम्मत योग्य घोषित कर दिया है। वहीं, बिलासपुर कोतवाली में 56 पुलिस कर्मियों को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत मकान खाली कराए गए थे। शर्त थी कि उनके लिए नए मकान और जी प्लस 1 पुलिस स्टेशन बनाया जाएगा, लेकिन आज तक बजट भी आवंटित नहीं हुआ।

बजट तो बना, पर फंसा फाइलों में

पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन को पहली बार भवनों की मरम्मत के लिए 10 करोड़ रुपए का बजट तो मिला है, लेकिन अभी तक राशि जारी नहीं हुई। 500 जी-टाइप और 2384 एच-टाइप नए क्वार्टर बनाने के लिए 390 करोड़ रुपए का प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन प्रशासनिक स्वीकृति लंबित है।

अब तक क्या बना-

2018 से 2024 के बीच 390 एच-टाइप और 1296 जी-टाइप क्वार्टर बने। 2025 में अब तक 192 एच-टाइप और 36 जी-टाइप क्वार्टर पूरे हो चुके हैं। फिलहाल 506 एच-टाइप और 132 जी-टाइप क्वार्टर निर्माणाधीन हैं।

कोर्ट का सख्त रुख-

हाईकोर्ट ने साफ कहा कि, जीर्ण-शीर्ण मकानों को खाली कराया जाए और पुनर्निर्माण की कार्यवाही तत्काल हो। जिन जवानों को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के चलते विस्थापित किया गया, उन्हें नए मकान दिए जाएं। सभी लंबित बजट प्रस्तावों को तुरंत मंजूरी देकर आवासीय संतुष्टि स्तर बढ़ाया जाए। हाई कोर्ट ने पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर को अगली सुनवाई (24 सितंबर) तक ताजा स्थिति का ब्योरा देने का निर्देश दिया है। साथ ही वित्त विभाग के सचिव को भी कोर्ट में हलफनामा दाखिल करने को कहा गया है।