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रायपुर में महिला साइंटिस्ट बनी ठगी का शिकार, डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 42 लाख की ठगी

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रायपुर। राजधानी रायपुर में एक बार फिर डिजिटल ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। ठगों ने खुद को टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) का अधिकारी बताकर एक महिला साइंटिस्ट को जाल में फंसा लिया और 42 लाख रुपए की ठगी कर ली। महिला वैज्ञानिक का दावा है कि ठगों ने उन्हें डिजिटल अरेस्ट में रखकर लगातार मानसिक दबाव बनाया और ह्यूमन ट्रैफिकिंग में शामिल होने का डर दिखाकर उनसे रकम निकलवा ली। रिटायर्ड महिला वैज्ञानिक बनी शिकार

जानकारी के अनुसार, पीडि़त महिला की उम्र 72 वर्ष है और वह चंडीगढ़ स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ माइक्रो बीएल टेक्नोलॉजी से बतौर साइंटिस्ट रिटायर हुई हैं। वर्तमान में वह रायपुर में रह रही थीं। ठगों ने पहले उनके मोबाइल नंबर पर कॉल किया और खुद को ट्राई का अधिकारी बताया। ह्यूमन ट्रैफिकिंग में फंसाने की धमकी ठगों ने महिला को यह कहकर डराया कि उनका मोबाइल नंबर और बैंक खाता ह्यूमन ट्रैफिकिंग और मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गंभीर आपराधिक गतिविधियों में इस्तेमाल हो रहा है। उन्होंने कहा कि अगर तुरंत जांच में सहयोग नहीं किया तो उन्हें जेल जाना पड़ सकता है।

डिजिटल अरेस्ट का शिकार हुई महिला ठगों ने महिला से कहा कि अब वह डिजिटल अरेस्ट में हैं। इसका मतलब यह था कि जब तक जांच पूरी नहीं होगी, उन्हें मोबाइल और इंटरनेट पर निगरानी में रहना होगा। लगातार वीडियो कॉल और फोन पर दबाव बनाकर उन्हें मानसिक रूप से बंधक बना लिया गया। भयभीत महिला वैज्ञानिक ने ठगों की बातों पर विश्वास कर लिया और अपने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया  खाते से अलग-अलग किश्तों में कुल 42 लाख रुपए RTGS के माध्यम से ठगों के बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए।

जब होश आया तो दर्ज कराई FIR

ठगी का एहसास होने पर महिला ने तुरंत मामले की शिकायत पुलिस से की। उनकी शिकायत पर कोतवाली थाने में अज्ञात ठगों के खिलाफ धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की धाराओं में अपराध दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह मामला एक नए प्रकार की साइबर ठगी का है, जिसमें लोगों को डिजिटल अरेस्ट कर मानसिक दबाव बनाया जाता है। पुलिस साइबर सेल की मदद से उन खातों की जानकारी जुटा रही है, जिनमें पैसा ट्रांसफर किया गया है। साथ ही कॉल डिटेल और बैंक ट्रांजैक्शन की जांच की जा रही है।