सरकारी सप्लाई में अनियमितता, दुर्ग के मनीष पारख सहित दर्जनों ठिकानों पर ईओडब्लू की रेड

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दुर्ग । सरकारी सप्लाई में अनियमितता के मामले को लेकर ईओडब्लू ने दुर्ग के मनीष पारख सहितरायपुर, राजनांदगांव, और धमतरी में रेड की कार्रवाई की है। सुबह से चली कार्यवाही के बाद मनीष पारख को पूछताछ के लिए ईडी ने रायपुर तलब किया है।

राजनांदगांव में तीन स्थानों पर एक साथ छापे मारे गए हैं। दुर्ग में महावीर नगर स्थित कारोबारी मनीष पारख के यहां भी जांच जारी है,मनीष पारख की आर्य नगर में लाईफ केयर,अवीष एडूकाम व इंदिरा मार्केट में इलेक्ट्रानिक्स की भी दुकान है। जबकि धमतरी में भी कार्रवाई की गई है।

छत्तीसगढ़ के दुर्ग में बुधवार सुबह एसीबी-इओडब्ल्यू ने मेघ गंगा ग्रुप के संचालक मनीष पारख के ठिकानों पर छापा मारा है. यह कार्रवाई भी डीएमएफ घोटाले के तार से जुड़ी बताई जा रही है. अधिकारियों की टीम मौके पर दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण की जांच कर रही है.

जानकारी के मुताबिक, एजेंसी के अधिकारियों ने इन ठिकानों से महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खंगाले हैं. मनीष पारख का नाम पहले भी सुर्खियों में रहा है, जब उनके नेहरू नगर स्थित इमेज डायग्नोसिस सेंटर ( लाइफ केयर) में एक डॉक्टर पर गर्भवती महिला से छेड़छाड़ का आरोप लगा था. इस कार्रवाई से कारोबारियों और सप्लायरों के बीच हड़कंप मच गया है.

कार्रवाई डीएमएफ घोटाले से जुड़ी है, जिसमें कारोबारियों, सप्लायर और ब्रोकरों पर छापेमारी की गई। यह जांच डीएमएफ फंड के तहत सरकारी सप्लाई में अनियमितताओं और कमीशन लेनदेन को लेकर की जा रही है। टीमें फिलहाल शासकीय सप्लाई से जुड़े दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर रही है।

बताया जा रहा है कि डीएमएफ घोटाले में पहले भी कई बड़े अधिकारी जेल जा चुके हैं। हालांकि, अब तक अधिकारियों की ओर से किसी भी कार्रवाई को लेकर आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से जारी की गई जानकारी के मुताबिक  रिपोर्ट के आधार पर ईओड़ब्लू ने धारा 120 बी 420 के तहत केस दर्ज किया है। इस केस में यह तथ्य निकल कर सामने आया है कि डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फंड कोरबा के फंड से अलग-अलग टेंडर आवंटन में बड़े पैमाने पर आर्थिक अनियमितताएं की गईं है। टेंडर भरने वालों को अवैध लाभ पहुंचाया गया।

श्वष्ठ के तथ्यों के मुताबिक टेंडर करने वाले संजय शिंदे, अशोक कुमार अग्रवाल, मुकेश कुमार अग्रवाल, ऋषभ सोनी और बिचौलिए मनोज कुमार द्विवेदी, रवि शर्मा, पियूष सोनी, पियूष साहू, अब्दुल और शेखर नाम के लोगों के साथ मिलकर पैसे कमाए गए डिस्ट्रिक मिनरल फंड (ड़ीएमएफ) घोटाला मामले में कलेक्टर को 40 प्र.श. सीईओ 5 प्र.श, एसडीओ 3 प्र.श. और सब इंजीनियर को 2 प्र.श. कमीशन मिला। डीएमएफ के वर्क प्रोजेक्ट में करप्शन के लिए फंड खर्च के नियमों को बदला गया था।

फंड खर्च के नए प्रावधानों में मटेरियल सप्लाई, ट्रेनिंग, कृषि उपकरण, खेल सामग्री और मेडिकल उपकरणों की कैटेगरी को जोड़ा गया था, ताकि संशोधित नियमों के सहारे डीएमएफ के तहत जरूरी डेवलपमेंट वर्क को दरकिनार कर अधिकतम कमीशन वाले प्रोजेक्ट को किया जा सके।

यह खुलासा कोरबा में 575 करोड़ रुपए से ज्यादा के हुए डीएमएफ स्कैम की जांच में हुआ है। इसकी पुष्टि रायपुर कोर्ट में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) द्वारा पेश किए गए 6 हजार पेज के चालान से हुई है।

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