रांची। बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर शुक्रवार को एक बड़ा विमान हादसा टल गया। भुवनेश्वर से रांची आ रही इंडिगो एयरलाइंस की फ्लाइट 6E-7361 की लैंडिंग के दौरान विमान की हार्ड लैंडिंग हुई, जिसमें उसका पिछला हिस्सा रनवे से टकरा गया। इस जोरदार झटके से विमान में सवार 56 यात्रियों में दहशत फैल गई और कुछ यात्रियों को मामूली चोटें आने की सूचना है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पायलट को उड़ान के दौरान तकनीकी समस्या का आभास हुआ था, जिसके बाद एहतियातन हार्ड लैंडिंग कराई गई। विमान ने शाम 7:55 बजे भुवनेश्वर से उड़ान भरी थी और रात 8:30 बजे रांची पहुंचना था। लैंडिंग के समय अचानक तेज झटका लगने और विमान का निचला हिस्सा जमीन से टकराने से यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए विमान को सुरक्षित रूप से एप्रन तक पहुंचा दिया।
घटना के तुरंत बाद रांची एयरपोर्ट प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर विमान को ग्राउंडेड घोषित कर दिया। इंजीनियरों की शुरुआती जांच में विमान के टेल सेक्शन को नुकसान पहुंचा पाया गया, जिसके चलते उसे उड़ान के लिए अनुपयुक्त माना गया है।
अगली उड़ान रद्द, यात्रियों में नाराजगी
इस घटना का असर रांची से भुवनेश्वर जाने वाली इंडिगो की अगली फ्लाइट पर भी पड़ा, जिसे रद्द कर दिया गया। इस उड़ान के लिए टिकट लेकर इंतजार कर रहे 77 यात्रियों ने देर रात एयरपोर्ट पर विरोध जताया। यात्रियों का आरोप था कि एयरलाइन की ओर से समय पर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। पहले रात करीब 9:40 बजे उड़ान को ग्राउंडेड बताया गया और बाद में कहा गया कि 6–7 घंटे बाद वैकल्पिक विमान उपलब्ध कराया जाएगा, लेकिन देर रात तक कोई व्यवस्था नहीं हो सकी। अंततः इंडिगो को यात्रियों के लिए होटल में ठहरने और भोजन की व्यवस्था करनी पड़ी।
विमानन सुरक्षा पर उठे सवाल
उल्लेखनीय है कि हाल के दिनों में विमानों से जुड़ी तकनीकी खामियों और लैंडिंग से संबंधित घटनाओं में बढ़ोतरी देखने को मिली है। कुछ दिन पहले ही एक विमान के इंजन से उड़ान के दौरान धुआं निकलने की घटना सामने आई थी, जिसके बाद इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी थी। ऐसी घटनाओं ने देश में विमानन सुरक्षा मानकों को लेकर चिंता बढ़ा दी है और नियामक एजेंसियों से सुरक्षा प्रक्रियाओं की दोबारा समीक्षा की मांग तेज हो गई है।
विमानों की कमी से जूझ रहा विमानन क्षेत्र
भारतीय विमानन उद्योग इस समय विमानों की भारी कमी का सामना कर रहा है। इंडिगो समेत कई एयरलाइनों को प्रैट एंड व्हिटनी इंजन से जुड़ी तकनीकी समस्याओं और लंबी मेंटेनेंस प्रक्रिया के कारण कई विमानों को लंबे समय तक ग्राउंडेड रखना पड़ रहा है। इससे उड़ानों के संचालन पर दबाव बढ़ गया है और यात्रियों की बढ़ती मांग को पूरा करना एयरलाइनों के लिए चुनौती बनता जा रहा है।