बिना जिम्मेदारी सौंपे सजा नहीं दे सकता प्रबंधन, हाईकोर्ट का SECL को सख्त संदेश
यह मामला SECL में पदस्थ लेखा अधिकारी रजनीश कुमार गौतम से जुड़ा है, जिन पर पूर्व सैनिकों की एजेंसियों से जुड़े कोयला लोडिंग और परिवहन बिलों की बकाया राशि वसूल न कर पाने का आरोप लगाकर उन्हें एक वर्ष के लिए डिमोशन और इंक्रीमेंट रोकने जैसी कठोर सजा दी गई थी। कोर्ट ने इस पूरे मामले को प्रशासनिक लापरवाही और जिम्मेदारी तय किए बिना की गई कार्रवाई करार दिया।
जस्टिस ए.के. प्रसाद की सिंगल बेंच ने रिकॉर्ड की जांच में पाया कि संबंधित बिलों की ऑडिट, स्वीकृति और वसूली की जिम्मेदारी पहले से ही क्षेत्रीय वित्त विभाग को दी गई थी। याचिकाकर्ता की भूमिका केवल औपचारिक रिकॉर्ड प्रक्रिया तक सीमित थी। बावजूद इसके, उन्हें वित्तीय नुकसान का जिम्मेदार ठहराया गया।
कोर्ट ने अनुशासनात्मक प्राधिकारी द्वारा वैधानिक नियमों और प्रशासनिक निर्देशों की अनदेखी को गंभीर त्रुटि मानते हुए आदेश दिया कि लेखा अधिकारी पर लगाया गया दंड तत्काल समाप्त किया जाए। तीन महीने के भीतर वेतन, रोका गया इंक्रीमेंट और अन्य बकाया का भुगतान किया जाए।