बस स्टैंड की बदहाली पर हाई कोर्ट नाराज, कहा—सार्वजनिक स्थल पर मूलभूत सुविधाएं देना प्रशासन की जिम्मेदारी
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के खरोरा बस स्टैंड की बदहाली को लेकर हाई कोर्ट की नाराजगी सामने आई है। नाराज कोर्ट ने कहा, बस स्टैंड सार्वजनिक स्थल है, यहां मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है।
खरोरा नगर पंचायत का बस स्टैंड बदहाल है, यात्रियों के लिए पीने की पानी की व्यवस्था है और न ही बैठने के लिए कोई सुविधा। कोर्ट कमिश्नर ने कुछ इस तरह का रिपोर्ट डीविजन बेंच के समक्ष सौंपी थी। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने अव्यवस्थाको लेकर कड़ी नाराजगी जताई है।
डिवीजन बेंच ने कहा कि, बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक स्थल पर सुविधाएं उपलब्ध कराना नगरीय निकाय प्रशासन की जिम्मेदारी है। कोर्ट ने नगर पंचायत खरोरा के मुख्य नगर पालिका अधिकारी CMO को नोटिस जारी करते हुए शपथ-पत्र के साथ जवाब पेश करने कहा है।
हाई कोर्ट ने बस स्टैंड की बदहाली को लेकर प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट्स को स्वतः संज्ञान में लेते हुए जनहित याचिका के रूप में सुनवाई शुरू की है। पूर्व में हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान नगर पंचायत के सीएमओ को शपथपत्र के साथ जवाब प्रस्तुत करने कहा था। कोर्ट ने एडवोकेट प्रगल्भ शर्मा को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने कहा था।
ये है कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट
कोर्ट कमिश्नर ने अपनी रिपोर्ट में बताया है, बस स्टैंड में यात्रियों के लिए न तो पंखों की व्यवस्था है और न ही पीने के लिए पानी उपलब्ध है। प्रवेश द्वार पर मवेशियों को रोकने अस्थायी स्टील रेलिंग लगाई गई है। पुरुष और महिला शौचालय में गंदगी और बदबू है। प्रतीक्षालय में पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं, न वाटर कूलर. न ही वाटर डिस्पेंसर उपलब्ध है। बारिश में जलभराव से बचाव के लिए अस्थायी नाली बनाई गई, जिसका बजट अनुमोदन लंबित है।
सीएमओ ने ऐसा दिया जवाब
नगर पंचायत खरोरा के सीएमओ ने जवाब में बताया कि, अस्थायी ड्रेनेज लाइन के लिए टेंडर की प्रक्रिया चल रही है। पंखे लगाने और पीने के पानी की व्यवस्था के लिए अतिरिक्त बजट की जरूरत है। इस संबंध में पहले ही आवश्यक कार्रवाई शुरू की जा चुकी है। हाईकोर्ट ने कहा, बजट का बहाना बनाकर सार्वजनिक सुविधा से समझौता नहीं किया जा सकता। डिवीजन बेंच ने स्पष्ट कहा कि बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक स्थल पर यात्रियों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना नगरीय निकाय प्रशासन की जिम्मेदारी है, इसे टाला नहीं जा सकता।