अवमानना केस में फंसे वकील ने हाई कोर्ट से मांगी माफी, जानिए अदालत ने दी राहत या सुनाया सख्त फैसला…
बिलासपुर। न्यायालयीन अवमानना के घेरे में फंसे एक वकील ने अभद्रता के लिए अदालत से माफी मांगी है। वकील ने कोर्ट से कहा, क्षणिक आवेश के चलते उससे बड़ी चूक हो गई, लिहाजा पहली गलती को माफ किया जाए। बता दें, अदालत ने अधिवक्ता के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू कर दी थी।
छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने अंबिकापुर के एक अधिवक्ता को राहत दे दी है। दरअसल, हाई कोर्ट ने अदालत में अभद्र आचरण व गरिमा के खिलाफ टिप्पणी करने पर अधिवक्ता के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू कर दी थी। सुनवाई के दौरान उपस्थित अधिवक्ता ने बिना शर्त माफी मांग ली, इसके बाद हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई को – समाप्त कर दिया है। उन्हें भविष्य के लिए चेतावनी भी दी है।
छत्तीसगढ़ अंबिकापुर के JMFC न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ने हाई कोर्ट को एक रेफरेंस भेजा था, इसमें अंबिकापुर के अधिवक्ता राजवर्धन सिंह के आचरण को लेकर सवाल उठाए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए अधिवक्ता को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में सुनवाई के दौरान अधिवक्ता राजवर्धन सिंह व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए। उन्होंने शपथ पत्र प्रस्तुत कर बताया कि वह बीते 30 वर्षों से वकालत के पेशे में हैं। घटना के संबंध में उन्होंने स्पष्ट किया कि जो कुछ भी हुआ वह केवल क्षण भर के आवेश में हुआ था और उनका इरादा कभी भी न्यायाधीश या अदालत की गरिमा को ठेस पहुंचाने का नहीं था। उन्होंने अपनी गलती पर गहरा पछतावा जताते हुए भविष्य में इस तरह की गलती नहीं दोहराने का भरोसा दिलाया।
हाई कोर्ट ने अधिवक्ता की आयु, उनके लंबे पेशेवर अनुभव और उनके द्वारा व्यक्त किए गए पछतावे पर विचार करते हुए माफी मंजूर कर ली है। आदेश में कहा कि न्याय के हित में उनकी बिना शर्त माफी को स्वीकार करना उचित होगा। हाई कोर्ट ने अवमानना की कार्रवाई को समाप्त करते हुए उन्हें सख्त चेतावनी दी है कि वे भविष्य में अदालत की गरिमा और मर्यादा का पूरी तरह सम्मान करेंगे।