ओपी चौधरी का बजट कल, बजट में फंड मैनेजमेंट के लॉन्ग टर्म प्लान पर रहेगा जोर
रायपुर। छत्तीसगढ़ में सबकी निगाहें मंगलवार, 24 फरवरी को पेश होने जा रहे राज्य के बजट पर है। विधानसभा का मानसून सत्र 23 फरवरी से शुरू हो गया है और इसी दिन प्रदेश का आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया जाएगा। इसके अगले दिन ही वित्त मंत्री ओपी चौधरी राज्य का बजट प्रस्तुत करेंगे। बजट को लेकर अटकलों के साथ साय सरकार की प्राथमिकताओं पर भी निगाह रहेगी। विष्णु देव साय सरकार के तीसरे बजट से जनता की झोली में क्या आएगा, यह मंगलवार को पता चल जाएगा। इससे पहले बजट की संभावनाओं पर ही बातचीत चल रही है।
साय सरकार ने कांग्रेस सरकार की 2100 रुपये की जगह 3500 रुपये प्रति क्विंटल में किसानों से धान खरीदी है। ऐसा कर भाजपा ने विधानसभा चुनाव से पहले किया अपना वादा निभाया है। इसके अलावा महतारी वंदन योजना में हर पात्र महिला को हर माह एक हजार रुपये देने की घोषणा को भी तत्काल लागू किया है। आर्थिक जानकारों का कहना है कि ये दोनों योजनाएं सरकार के सामने वित्तीय प्रबंधन की कड़ी चुनौती पेश कर रही है। एक आंकलन के अनुसार बजट का करीब 30 हजार करोड़ रुपये इन दोनों ही योजनाओं में खर्च हो जा रहे हैं। हालांकि इसे कृषि विकास और मातृ शक्ति को बढ़ावा देने से जोड़ कर देखा जा रहा है, लेकिन इसके साथ विकास का संतुलन बनाना थोड़ा कठिन हो गया है। राजकोषीय घाटा 3.8 प्रतिशत के आसपास रहने का अनुमान लगाया गया था, देखें इस बार बजट में अंतिम आंकड़ा क्या आता है।
एक लाख 65 हजार करोड़ से बढ़ेगा बजट
बीते साल वित्त मंत्री ने प्रदेश के लिए एक लाख 65 हजार करोड़ रुपये का बजट पेश किया था। यह बजट वर्ष 2024-25 की तुलना में करीब 12 प्रतिशत ज्यादा था, जो बताता है कि सरकार वित्तीय अनुशासन बनाए रखने में कामयाब रही है। उम्मीद की जा रही है कि इस बार भी बजट में बढ़ोतरी होगी और आंकड़ा एक लाख 80 हजार करोड़ के पार जा सकता है। इससे तय है कि विकास और सरकार के कामकाज के लिए अच्छा खासा फंड मिल सकता है। इसमें हमेशा की तरह कृषि सेक्टर के साथ युवाओं के लिए स्वरोजगार के अलावा महिलाओं का ख्याल रखा जा सकता है। सरकार का फोकस शिक्षा की ओर भी है, ऐसे में प्रदेश में नए नालंदा परिसर के लिए बजट में प्रावधान किया जा सकता है। स्वदेशी सिद्धांत के आधार पर चल कर सरकार विकास के रास्ते तय कर सकती है। नए स्कूल-कॉलेज भवन के साथ नए थानों के लिए फंड मिल सकता है। स्वास्थ्य सेक्टर को पिछले बजट में 12 नए नर्सिंग कॉलेज के साथ काफी सौगात दी गई थी और इस बार भी स्वास्थ्य क्षेत्र में घोषणाएं की जा सकती हैं।
साय सरकार ने शहरों के विकास के लिए कई प्लान पर काम किया है, लेकिन अभी प्रभावी तरीके से लागू नहीं हो सका है। नगर निगमों को 100 से 50-50 करोड़ रुपये का फंड चालू वित्तीय वर्ष में दिया गया है। इसके जरिए शहरों में कहीं- कहीं विकास के काम हुए हैं। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि ज्यादातर नगरीय निकाय घाटे में चल रहे हैं या विकास का फंड जमा नहीं कर पा रहे हैं। इस कारण सारे विकास के लिए नगरीय निकाय प्रशासन के जरिए शहरों को फंड देना पड़ रहा है। सरकार इस प्रयास में है कि नगरीय निकाय कमाई का मजबूत स्रोत बनाएं, इससे विकास के काम तेजी से हो सकेंगे। फिलहाल नगरीय निकायों का चूनाव दूर है, इस कारण सरकार के पास इसके बंदोबस्त के लिए पर्याप्त समय है।