गोदावरी इस्पात को 295 एकड़ जमीन सिर्फ 28 लाख में, मामला विधानसभा तक पहुंचा, उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन रहे चुप
रायपुर। गोदावरी इस्पात को करोड़ों रुपये की जमीन कौड़ी के मोल दिए जाने का मुद्दा, प्रश्नकाल के दौरान सदन में उठा। विधायक चातुरी नंद व द्वारिकाधीश यादव ने उद्योग मंत्री से सीधे सवाल किया, ग्रामीणों के अलावा ग्रामसभा के विरोध के बाद जमीन का आवंटन किन नियमों के तहत किया गया है। जमीन देने में गोदावरी इस्पात के साथ इतनी उदारता क्यों और किन कारणों से बरती गई है। करोड़ों रुपये की जीन कौड़ी के माेल देने के पीछे के कारण क्या हैं। विपक्षी सदस्यों के इन सवालों का मंत्री लखन लाल देवांगन के पास जवाब ही नहीं था। इस दौरान सदन में विपक्ष ने जमकर हंगामा मचाया और इस्पात कंपनी को उपकृत करने वाले अफसरों को बचाने का आरोप लगाया। मंत्री पूरे समय सदन में घिरे रहे|
विधायक चातुरी नंद ने गोदावरी इस्पात को आवंटित किए गए जमीन का मुद्दा उठाया। विधायक चातुरी ने कहा,उद्योग विभाग के अफसरों ने गजब कर दिया है। ग्राम जंगलबेडा, तहसील सरायपाली, जिला-महासमुंद में 102.93 हेक्टेयर शासकीय भूमि को 4 लाख 82 हजार 300 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से 99 वर्ष की लीज पर प्रदान की गई है।
राज्य में सोलर प्लांट स्थापना हेतु क्या नीति है? रायपुर संभाग में अब तक कितनी-कितनी क्षमता के सोलर संयंत्र कहां-कहां पर स्थापित किए जा रहे हैं? उपरोक्त सोलर संयंत्रों को कितनी शासकीय और निजी भूमि किस दर पर लीज पर प्रदान की गई है? संयंत्रवार, आबंटित भूमि, निजी भूमि, लीज दर एवं लीज अवधि की जानकारी जिलावार प्रदान करें? (ख) सोलर संयंत्रों की स्थापना हेतु किसानों से निजी भूमि को किस दर पर लीज पर लेने का प्रावधान है? (ग) सोलर संयंत्र स्थापना में अनियमितता की कितनी शिकायतें वर्ष 2025 में प्राप्त हुई हैं? उक्त शिकायतों पर क्या कार्रवाई की गई है? जानकारी संयंत्रवार, जिलावार बताएं?
राज्य में सोलर प्लांट स्थापना हेतु ऊर्जा विभाग द्वारा सौर ऊर्जा नीति 2017-30 लागू की गई है, जिसका विवरण पुस्तकालय में रखे प्रपत्र-अ अनुसार है। उक्त सौर ऊर्जा नीति के तहत् प्रभावशील अवधि में स्थापित होने वाले सौर विद्युत उत्पादन संयंत्रों को औद्योगिक नीति में निहित औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन प्राप्त हो सकेंगे। वाणिज्य एवं उद्योग विभाग की औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के अंतर्गत सोलर संयंत्रों को औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है, जिसका विवरण पुस्तकालय में रखे संलग्न प्रपत्र-व अनुसार है। रायपुर संभाग में विभिन्न क्षमता के 14 सोलर संयंत्र पुस्तकालय में रखे प्रपत्र स एवं द में दर्शित स्थानों पर स्थापित किये जा रहे हैं।
उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने अपने लिखित जवाब में बताया है, सीएसआईडीसी से प्राप्त जानकारी अनुसार उक्त स्थापनाधीन सोलर संयंत्रों में से एक इकाई मेसर्स गोदावरी पावर एवं इस्पात लिमिटेड को ग्राम जंगलबेडा, तहसील सरायपाली, जिला-महासमुंद में 102.93 हेक्टेयर शासकीय भूमि राशि 4,82,300 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से 99 वर्ष की लीज पर प्रदान की गई है। किसी भी सोलर संयंत्र हेतु निजी भूमि अधिग्रहित नहीं की गई है। शासकीय भूमि पर स्थापनाधीन उद्योग की जानकारी पुस्तकालय में रखे प्रपत्र-स तथा निजी भूमि पर स्थापनाधीन उद्योग की जानकारी पुस्तकालय में रखे प्रपत्र-द अनुसार है। (ख) सोलर संयंत्रों की स्थापना हेतु किसानों से निजी भूमि लीज में शासन द्वारा लेने का कोई प्रावधान नहीं है। (ग) अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), सरायपाली, जिला-महासमुंद से प्राप्त जानकारी अनुसार सोलर संयंत्र मेसर्स गोदावरी पावर एवं इस्पात लिमिटेड, ग्राम-जंगलबेड़ा, तहसील- सरायपाली, जिला-महासमुंद की स्थापना के सम्बन्ध में अनियमितता की 03 शिकायतें वर्ष 2025 में प्राप्त हुई हैं, शिकायत तथा उन पर की गई कार्यवाही की जानकारी पुस्तकालय में रखे प्रपत्र-स अनुसार है।
विधायक द्वारिकाधीश यादव ने मंत्री से पूछा, एक साल में कंपनी सरकार के खजाने में कितना रुपये जमा करेगी। मंत्री एक साल के बजाय 28 साल की बात करने लगे। इस पर विधायक यादव ने कहा, किस प्रक्रिया के तहत इतनी कम दर पर कंपनी को भूमि आवंटित किया गया है। जमीन आवंटन की पूरी प्रक्रिया बता दीजिए। विधायक के इस सवाल का मंत्री के पास जवाब नहीं था। विधायक ने फिर पूछा,कितनी कंपनियों ने भाग लिया था, जमीन आवंटन के लिए किस नियमों के तहत प्रक्रिया अपनाई गई। इस सवाल का भी मंत्री के पास जवाब नहीं था। विधायक यादव ने कहा, मेरे सवालों का जवाब देने के बजाय मंत्री अलग बातें कर रहे हैं।
मूल प्रश्नकर्ता विधायक चातुरी नंद ने जमीन आवंटन के बाद वहां चल रही गतिविधियों को लेकर कहा, पूरे मामले में राज्य सरकार और कंपनी के द्वारा सुप्रीम कोर्ट के गाइड लाइन का सीधेतौर पर उल्लंघन किया जा रहा है। जंगलबेड़ा में स्थापित सोलर प्लांट के नियम कानून को ताक पर रखकर जमीनें दी गई है। ग्राम सभा के विरोध के बाद एकतरफा कार्रवाई की गई है।
विधायक चातुरी नंद ने सदन में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, जमीन आवंटन के बाद उस पूरे इलाके में कंपनी के द्वारा मनमर्जी के साथ काम किया जा रहा है। नियमों को ताक पर रख दिया है। ग्रामीणों के निरस्तारी और लाइफ लाइन कहे जाने वाले तालाब को पाट दिया है। नाला को पूरी तरह पाट दिया गया है। ग्रामीणों को परेशान करने की नियत से यह सब काम कंपनी के लोगों के द्वारा किया जा रहा है। आखिर कंपनी को यह सब अधिकार किसने दिया है। किसके संरक्षण में कंपनी नियमों के विपरीत काम कर रही है। इस पर मंत्री लखनलाल देवांगन ने कहा, विधायक के द्वारा इस संबंध में पहले भी शिकायत की गई थी। कलेक्टर ने उच्च स्तरीय जांच दल का गठन किया है। जांच रिपोर्ट के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।