RTE सीटों में गिरावट पर हाईकोर्ट ने उठाया सवाल, 85 हजार से 55 हजार तक कमी पर मांगा जवाब

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत आरक्षित सीटों में भारी कमी को लेकर Chhattisgarh High Court ने कड़ा रुख (RTE Seats Reduction Chhattisgarh) अपनाया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार के हलफनामे में कई विरोधाभास पाते हुए स्कूल शिक्षा विभाग से स्पष्ट और विस्तृत जवाब मांगा है।

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सबसे बड़ा सवाल यही उठाया कि जब पहले RTE के तहत करीब 85 हजार सीटें उपलब्ध थीं, तो यह संख्या घटकर लगभग 55 हजार कैसे रह गई। इस मुद्दे पर पहले ही स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन इस बार उनकी अनुपस्थिति में संयुक्त सचिव द्वारा हलफनामा प्रस्तुत किया गया।

राज्य सरकार की ओर से पेश हलफनामे में कई तथ्यों में असंगति सामने आई। दुर्ग जिले की शिकायतों के निपटारे को लेकर सरकार ने 77 मामलों के समाधान (RTE Seats Reduction Chhattisgarh) का दावा किया, जबकि कोर्ट में प्रस्तुत दस्तावेजों में केवल 7 मामलों के निराकरण की पुष्टि हुई। इस अंतर पर कोर्ट ने नाराजगी जताई और राज्य के दावों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए।

सरकार ने अपने पक्ष में कहा कि आगामी सत्र 2026-27 में प्री-प्राइमरी स्तर पर RTE के तहत प्रवेश नहीं दिया जाएगा, क्योंकि यह कानून 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों पर लागू होता है। इसी आधार पर बताया गया कि पिछले सत्र के 35,335 छात्र कक्षा 1 में जाएंगे और नए 19,540 छात्रों को प्रवेश मिलेगा, जिससे कुल 54,875 छात्रों को लाभ मिलेगा।

सुनवाई के दौरान निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर आरोप सामने आए। कुछ स्कूलों पर गलत तरीके से CBSE संबद्धता का दावा करने, फीस में मनमानी बढ़ोतरी और अभिभावकों को धमकाने जैसे आरोप लगाए गए। कोर्ट ने इन मामलों को गंभीर मानते हुए चिंता व्यक्त की और इस पर भी स्पष्ट जवाब मांगा है।

हाईकोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग को निर्देश (RTE Seats Reduction Chhattisgarh) दिया है कि सभी मुद्दों पर विस्तृत हलफनामा अगली सुनवाई से पहले पेश किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल 2026 को तय की गई है, जहां सरकार को अपने पक्ष को पूरी तरह स्पष्ट करना होगा।

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