दिव्यांग बेटी को अपने पास रखने की इजाजत मांगने पहुंची सौतेली मां, हाई कोर्ट ने याचिका ठुकराई
बिलासपुर। सौतेेली मां ने दिव्यांग बेटी की सुरक्षा व संरक्षण का भरोसा दिलाते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर कर बेटी को साथ रखने के लिए गार्जियन नियुक्त करने की गुहार लगाई थी। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने मां की याचिका को खारिज कर दिया है। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में फैमिली कोर्ट द्वारा दी गई व्यवस्थाओं का हवाला दिया है। याचिकाकर्ता मां को राहत देते हुए हाई कोर्ट ने उसे स्थानीय स्तर की कमेटी के समक्ष आवेदन पेश करने की छूट दी है। मां के लिए बेटी को पाने के लिए यह राहत वाली बात है।
दिव्यांग पुत्री की मां की मौत के बाद याचिकाकर्ता महिला ने उसके पिता से 15 दिसंबर 2012 को दूसरी शादी की। शादी के बाद पति-पत्नी में विवाद होने पर उसने सौतेली दिव्यांग बेटी को लेकर अपने मायके आ गई। सौतेली मां का दावा है, वह उसे सगी मां की तरह देखभाल करती है। दिव्यांग बेटी भी मां के साथ ही रहने की बात कहती है। पिता अक्टूबर 2022 को मनेन्द्गगढ़ आया झगड़ा कर और पत्नी से झगड़ा करते हुए बेटी को अपने साथ जबरदस्ती ले जाने का प्रयास किया। पुलिस हस्तक्षेप के कारण वह बेटी को अपने साथ नहीं ले जाया पाया।
दिव्यांग बेटी और उसके साथ पति के व्यवहार को देखते हुए सरकारी नौकरी करने वाली पत्नी ने फैमिली कोर्ट में याचिका दायर कर दिव्यांग बेटी का गार्जियन बनने विधिवत आवेदन पेश किया और उसकी सुरक्षा व अभिरक्षा में ही बेटी को रहने देने के संंबंध में आदेश जारी करने की मांग की। मामले की सुनवाई के बाद फैमिली कोर्ट ने कानूनी बाध्यताओं का हवाला देते हुए याचिका को खारिज कर दिया।
परिवार न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए पत्नी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में उसने फैमिली कोर्ट में की गई मांगों को दोहराया और दिव्यांग बेटी की सुरक्षा का भरोसा दिलाते हुए गार्जियन के रूप में मान्यता देने की मांग की। परिवार न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए याचिका को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता को राहत देते हुए हाई कोर्ट ने कहा, दिव्यांगों के कल्याण के लिए गठित स्थानीय कमेटी के समक्ष आवेदन पेश करने की छूट प्रदान की।
याचिकाकर्ता मनेन्द्रगढ़ निवासी महिला जो दिव्यांग बेटी की सौतेली मां है, बेटी की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर गार्जियन बनने परिवार न्यायालय में आवेदन पेश किया था। दिव्यांग व्यक्ति के लिए गार्जियन नियुक्त करने के संबंध में दायर किए जाने वाले आवेदन पर विचार करने का अधिकार ना होने का हवाला देते हुए फैमिली कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया था।
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, इस मामले में, खास कानून 1999 का एक्ट 30 दिसंबर 1999 से लागू किया गया है। फैमिली कोर्ट के पास दिव्यांग व्यक्ति के गार्जियन की नियुक्ति के लिए पेश आवेदन पर विचार करने का कोई अधिकार नहीं है। 19 जनवरी 2026 से कोरिया (बैकुंठपुर) में स्थानीय स्तर की कमेटी पहले ही बनाई जा चुकी है। याचिकाकर्ता को इसी समिति के समक्ष आवेदन पेश करने के लिए हाई कोर्ट ने छूट दी है।