जग्गी मर्डर केस में अहम अपडेट, अमित जोगी की दो याचिकाओं को एक साथ किया टैग, 23 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट करेगा होगी संयुक्त सुनवाई

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ एनसीपी नेता स्व रामअवतार जग्गी हत्याकांड में छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के फैसले को चुनाैती देते हुए अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट में दो अलग-अलग याचिका दायर की है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के डिवीजन बेंच में याचिका की सुनवाई हुई। डिवीजन ने याचिका की सुनवाई के लिए 23 अप्रैल की तिथि तय कर दी है। बता दें, हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच ने जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी को मास्टर माइंड करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। हाई कोर्ट ने तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया है।

बता दें, हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने को चुनौती देते हुए अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील पेश की है। इसके अलावा अमित की ओर से एक और याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई है। अमित जोगी ने याचिका दायर कर हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक सरेंडर करने पर स्थगन की मांग की है।

सुनवाई के दौरान अदालत में मृतक रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी के वकील खड़े हुए थे। इस बेंच ने सरेंडर करने से किसी रियायत देने से मना कर दिया और कहा, जिस जज के चेंबर में यह आवेदन लगाया गया है वही इसका फैसला करेंगे। अमित जोगी ने अपने फेसबुक वॉल पर लिखा है, सर्वोच्च न्यायालय ने आज दोनों मामलों को एक साथ टैग कर दिया है

25 मार्च 2026 के लीव टू अपील आदेश के विरुद्ध मेरी एसएलपी और 02 अप्रैल.2026 के उच्च न्यायालय के निर्णय के विरुद्ध वैधानिक अपील, दोनों मामलों की संयुक्त सुनवाई 23 अप्रैल को निर्धारित की गई है। अमित ने लिखा है, मेरी ओर से आज वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, मुकुल रोहतगी, विवेक तन्ख, सिद्धार्थ दवे तथा शशांक गर्ग उपस्थित हुए।

एनसीपी के नेता स्व रामअवतार जग्गी हत्याकांड में छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच ने बड़ा फैसला सुनाया है। निचली अदालत के फैसले को रद्द करते हुए हाई कोर्ट ने हत्याकांड के प्रमुख आरोपी अमित जोगी को उम्र कैद की सजा सुनाई है। आजीवन कारावास के साथ ही एक हजार रुपये जुर्माना किया। जुर्माने की राशि ना पटाने पर छह महीने अतिरिक्त कठोर कारावास की सजा दी है। फैसले की खास बात ये कि डिवीजन बेंच ने सतीश जग्गी की याचिका को खारिज कर दिया है। 78 पेज में डिवीजन बेंच का यह फैसला आया है।

डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में क्या है?

  • आरोपी अमित जोगी उर्फ ​​अमित ऐश्वर्या जोगी को आईपीसी की धारा 302 के साथ धारा 120-बी के तहत दंडनीय अपराध का दोषी ठहराया जाता है और उसे आजीवन कारावास के साथ 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाता है, और जुर्माना न भरने पर छह महीने का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।
  • अपीलकर्ता-सीबीआई द्वारा दायर अपील स्वीकार की जाती है। शिकायतकर्ता सतीश जग्गी द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका का भी निपटारा किया जाता है। चूंकि हमने 04 अप्रैल.2024 के निर्णय के माध्यम से अन्य संबंधित अपीलों में अन्य आरोपियों/दोषियों को दी गई दोषसिद्धि और सजा की पुष्टि पहले ही कर दी है, इसलिए शिकायतकर्ता सतीश जग्गी द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका निष्प्रभावी होने के कारण खारिज की जाती है।
  • आरोपी-अमित जोगी उर्फ ​​अमित ऐश्वर्या जोगी जमानत पर है। उनकी जमानत आज से तीन सप्ताह की अवधि तक प्रभावी रहेगी, इस दौरान उन्हें संबंधित ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करना होगा, ऐसा न करने पर ट्रायल कोर्ट उन्हें हिरासत में ले लेगा और इस न्यायालय द्वारा दी गई सजा को पूरा करने के लिए उन्हें जेल भेज देगा।
  • रजिस्ट्री को निर्देश दिया जाता है कि वह इस फैसले की एक प्रति, आरोपी अमित जोगी उर्फ ​​अमित ऐश्वर्या जोगी को भेजे, और उन्हें सूचित करे कि उन्हें सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष इस फैसले को चुनौती देने का अधिकार है, चाहे वे स्वतंत्र रूप से चुनौती दें या कानूनी सहायता से।
  • रजिस्ट्रार (न्यायिक) को यह भी निर्देश दिया जाता है कि इस निर्णय की प्रमाणित प्रति, मूल निचली अदालत के अभिलेखों के साथ, संबंधित निचली अदालत को सूचना और आवश्यक कार्रवाई, यदि कोई हो, के लिए आज से एक सप्ताह की अवधि के भीतर भेजी जाए।

जब सभी आरोपियों पर एक ही अपराध में सहभागिता का आरोप हो, तो किसी विशेष आरोपी के पक्ष में कृत्रिम भेदभाव नहीं किया जा सकता। जहां अभियोजन पक्ष का मामला सभी आरोपियों के खिलाफ समान साक्ष्यों पर आधारित हो, वहां एक आरोपी को बरी करते हुए अन्य को उसी साक्ष्य के आधार पर दोषी ठहराना अनुचित होगा, जब तक कि उस आरोपी के पक्ष में बरी करने का कोई ठोस और निर्णायक मामला स्वतंत्र रूप से सिद्ध न हो जाए।

याचिकाकर्ता सतीश जग्गी के अधिवक्ता बीपी. शर्मा ने डिवीजन बेंच को बताया, सुप्रीम कोर्ट ने मामले को पुनर्विचार के लिए वापस छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट भेज दिया है। सीबीआई की ओर से उपस्थित अधिवक्ता वैभव ए. गोवर्धन और राज्य की ओर से उपस्थित उप महाधिवक्ता डॉ. सौरभ पांडे ने संयुक्त रूप से निवेदन किया कि राज्य ने 31 मई 2007 को आवेदन पेश कर निचली अदालत द्वारा पारित बरी करने के फैसले के खिलाफ अपील करने की अनुमति मांगी थी। उक्त आवेदन को इस न्यायालय की समन्वय पीठ ने 18 अगस्त 2011 को इस आधार पर खारिज कर दिया था, सीबीआई द्वारा जांच किए जा रहे मामले में राज्य द्वारा दायर अपील की अनुमति के लिए आवेदन स्वीकार्य नहीं है।

सीबीआई ने याचिका दायर कर 31 मई 2007 के फैसले और आदेश को चुनौती दी थी। हालांकि, इस न्यायालय की समन्वय पीठ ने 12 सितंबर 2011 के आदेश द्वारा विलंब के आधार पर इसे खारिज कर दिया था। इसके अतिरिक्त, अमित ऐश्वर्या जोगी की बरी होने को चुनौती देने के लिए पुनरीक्षण याचिका को आपराधिक अपील में परिवर्तित करने की मांग करते हुए शिकायतकर्ता सतीश जग्गी द्वारा दायर याचिका को भी 19 सितंबर 2011 के आदेश द्वारा खारिज कर दिया गया था।

18 अगस्त 2011, 12 सितंबर .2011 और 19 सितंबर 2011 के हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ,सतीश जग्गी व सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष याचिका दायर की थी। याचिका की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 06 नवंबर 2025 के आदेश के परिप्रेक्ष्य में याचिका दायर करने में हुई देरी को क्षमा कर दिया गया है।

याचिका को सीबीआई द्वारा दायर अपील की अनुमति के आवेदन पर गुण-दोष के आधार पर पुनर्विचार के लिए छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट को वापस भेज दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है, सीबीआई उक्त कार्यवाही में वास्तविक शिकायतकर्ता और राज्य को आवश्यक पक्षकार बनाए। सीबीआई के वकील वैभव ए गोवर्धन ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा 06 नवंबर 2025 को पारित आदेश की एक प्रति हाई कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की है, जिसे रिकॉर्ड में ले लिया गया है।

4 जून 2003 को एनसीपी नेता रामअवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने 31 लोगों को आरोपी बनाया था। बाद में बलटू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे। अमित जोगी को छोड़कर बाकी 28 लोगों को दोषी करार दिया गया था। हालांकि बाद में अमित जोगी को बरी कर दिया गया था। अमित जोगी को बरी किए जाने के खिलाफ रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। जिस पर अमित के पक्ष में स्टे ऑर्डर है।

कारोबारी बैकग्राउंड वाले रामअवतार जग्गी देश के बड़े नेताओं में शुमार पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व विद्याचरण शुक्ल के बेहद करीबी थे। जब शुक्ल कांग्रेस छोड़कर NCP में शामिल हुए तो जग्गी भी उनके साथ-साथ एनसीपी आ गए। स्व विद्याचरण ने जग्गी को छत्तीसगढ़ में NCP का कोषाध्यक्ष बना दिया था।

जग्गी हत्याकांड में अभय गोयल, याहया ढेबर, वीके पांडे, फिरोज सिद्दीकी, राकेश चंद्र त्रिवेदी, अवनीश सिंह लल्लन, सूर्यकांत तिवारी, अमरीक सिंह गिल, चिमन सिंह, सुनील गुप्ता, राजू भदौरिया, अनिल पचौरी, रविंद्र सिंह, रवि सिंह, लल्ला भदौरिया, धर्मेंद्र, सत्येंद्र सिंह, शिवेंद्र सिंह परिहार, विनोद सिंह राठौर, संजय सिंह कुशवाहा, राकेश कुमार शर्मा, (मृत) विक्रम शर्मा, जबवंत और विश्वनाथ राजभर दोषी हैं।