शिक्षा विभाग ने कसी लगाम, जांच में लापरवाही पर अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई, समयसीमा तय…
रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक शिक्षण संचालनालय DPI ने शिक्षा विभाग में चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाहियों और विभागीय जांच में हो रही देरी को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी महत्वपूर्ण निर्देश में सभी संभागीय संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी गई है, जांच प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। डीपीआई ने विभागयी जांच को तय समय सीमा में पूरा करने के लिए डेडलाइन जारी कर दिया है।
संचालनालय द्वारा यह पाया गया है, लोक सेवकों के विरुद्ध भेजी जाने वाली अनुशासनात्मक कार्यवाहियों के प्रस्ताव अक्सर अधूरे होते हैं और नियमों के विपरीत भेजे जा रहे हैं। इससे न केवल विधि सम्मत निर्णय लेने में देरी हो रही है, बल्कि दोषी कर्मचारियों को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिल रहा है। कई मामलों में प्रक्रियात्मक त्रुटियों के कारण कर्मचारी उच्च न्यायालय में चुनौती दे रहे हैं, जिससे विभाग की छवि धूमिल हो रही है।
डीपीआई द्वारा जारी नए निर्देशों पर गौर करें तो, विभागीय जांच को अब अनिवार्य रूप से समय-सीमा के भीतर पूरा करना होगा: मुख्य शास्ति (Major Penalty): अधिकतम 6 महीने व लघु शास्ति (Minor Penalty): अधिकतम 3 महीने में जांच पूरी करनी होगी।
अनुशासनात्मक कार्यवाही के प्रस्ताव में आरोपों का अभिकथन, साक्ष्य सूची और गवाहों की सूची स्पष्ट रूप से संलग्न होनी चाहिए। जांच अधिकारियों को ‘छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम, 1966’ के नियम-14 और 16 का कड़ाई से पालन करने कहा गया है। यदि अपचारी लोक सेवक सुनवाई में उपस्थित नहीं होता है, तो उसकी अनुपस्थिति दर्ज कर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच पूर्ण कर रिपोर्ट सौंपी जाए, ताकि मामले को लटकाया न जा सके। डीपीआई ने वित्तीय अनियमितता और गबन के मामलों में सभी प्रमाणिक अभिलेखों की स्पष्ट प्रतियां भेजना अनिवार्य कर दिया गया है।
प्रायः देखा जा रहा है कि लोक सेवकों के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही के लिए संस्थित विभागीय जांच के प्रकरणों, प्राप्त शिकायतों की जांच एवं अभिमत तथा शासन एवं संचालनालय को भेजे जाने वाले अनुशासनात्मक कार्यवाही के प्रस्ताव अधूरे एवं नियमों, निर्देशों के विपरीत भेजे जा रहे हैं। जिसके कारण अपचारी लोक सेवकों के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही में अनावश्यक विलंब की स्थिति निर्मित हो रही है। विभागीय जांच के प्रकरणों में नियमों, निर्देशों का पालन नहीं होने से अनुशासनात्मक कार्यवाही के प्रकरणों में विधि संगत निर्णय करने में अनावश्यक विलम्ब की स्थिति निर्मित हो रही है।
शासन तथा संचालनालय स्तर से भेजी जाने वाली शिकायतों पर त्वरित कार्यवाही करते हुए प्रकरण में जांच आवश्यक हो तो सक्षम अधिकारियों से जांच कराया जाकर प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर कार्यवाही सुनिश्चित करना होगा। यदि कार्यवाही शासन स्तर अथवा संचालनालय स्तर से संबंधित हो तो, प्रकरण के संबंध में विस्तृत तथ्यात्मक प्रतिवेदन के साथ युक्तियुक्त अभिलेख तथा प्रकरण में अनुशासनात्मक कार्यवाही किया जाना प्रस्तावित हो तो नियम में प्रावधानित कार्यवाही का स्पष्ट उल्लेख करते हुए स्पष्ट अभिमत एवं अनुशंसा करें।
शिकायतों पर कार्यवाही जिला, संभाग स्तर पर किये जाने योग्य हैं तो त्वरित कार्यवाही करते हुए की गई कार्यवाही से संचालनालय, शासन को प्रतिवेदन के माध्यम से अवगत कराना होगा। शासन, संचालनालय स्तर से प्रेषित शिकायतों, अनुशासनिक कार्यवाही,जांच प्रतिवेदनों, आरोप पत्रों के प्रतिवाद,अभ्यावेदन पर तथ्यात्मक प्रस्ताव के लिये प्रेषित प्रकरणों में दिए गए निर्देशों के अनुसार जांच, परीक्षण कर निर्धारित समय-सीमा में विस्तृत तथ्यात्मक प्रतिवेदन स्पष्ट अभिमत एवं अनुशंसा के साथ शासन, संचालनालय जैसी स्थिति हो, उपलब्ध कराने कहा गया है। सभी तथ्यों का गंभीरतापूर्वक परीक्षण कर प्रचलित नियमों का उल्लेख कर स्पष्ट अभिमत भेजना होगा।
शासन स्तर तथा संचालनालय को भेजे जाने वाले अनुशासनात्मक कार्यवाही के प्रस्ताव में प्रकरण के संबंध में विस्तृत तथ्यात्मक स्पष्ट प्रस्ताव । अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रकार, प्रचलित नियम का स्पष्ट उल्लेख तथा निलंबन / विभागीय जांच किया जाना है तो आरोप पत्रादि (आरोप पत्र, आरोप का अभिकथन, अभिलेख (साक्ष्य सूची) तथा गवाहों की (साक्षी) सूची लगाये गये आरोप के अनुरूप तथ्यात्मक जानकारी एवं साक्ष्य स्पष्ट एवं प्रमाणिक हों। किसी नियम का उल्लंघन का प्रकरण हो तो उस नियम का स्पष्ट उल्लेख करें।
डीपीआई ने अपने आदेश में लिखा है प्रकरण में किसी महत्वपूर्ण तथ्य को छिपाया न जाए। सभी तथ्यों का गंभीरतापूर्वक परीक्षण कर प्रस्ताव सुस्पष्ट अभिमत के साथ ही भेजना होगा। वित्तीय अनियमितता, हानि एवं गबन के प्रकरण में सुस्पष्ट प्रस्ताव तथा प्रकरण से संबंधित प्रमाणिक अभिलेख की स्पष्ट प्रति भेजनी होगी। जारी आदेश में लिखा है, जिस लोक सेवक के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही का प्रस्ताव भेजा जा रहा है उसके सेवा ब्यौरा निर्धारित प्रपत्र में प्रस्ताव के साथ जानकारी देनी होगी।