‘शेरू या राम’ सवाल बना विवाद: चौथी की अंग्रेजी परीक्षा के बाद DEO पर गिरी गाज
रायपुर। कुत्ते का नाम शेरू या राम? मामले में स्कूल शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। सरकार ने जांच के बाद जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद विजय कुमार लहरे को निलंबित कर दिया गया है।
जारी आदेश में लिखाा गया कि “चौथी की परीक्षा में सवाल पर बवाल, कुत्ते का नाम शेरू या राम ? को तत्काल संज्ञान में लेते हुए प्रकरण की जांच कराई गई। जांच में पाया गया कि जिला अंतर्गत संचालित प्राथमिक शालाओं के अर्धवार्षिक परीक्षा के प्रश्न पत्रों का निर्धारण, मुद्रण एवं वितरण की समस्त जवाबदारी संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी की थी, फिर भी विजय कुमार लहरे, प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी महासमुन्द द्वारा परीक्षा के लिए प्रश्न पत्र तैयार करने की प्रक्रिया का निर्धारण व कार्य योजना नहीं बनायी गई थी।
प्रश्न पत्र तैयार करने में गंभीर लापरवाही की गई है, जिसके कारण कक्षा चौथी के अंग्रेजी विषय के प्रश्न पत्र में पूछे गये प्रश्न में कुत्ते के नाम के विकल्प के रूप में हिन्दु धर्म के आराध्य देव भगवान राम का नाम सम्मिलित किया गया, जो कि बहुत ही आपत्तिजनक, निंदनीय व धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है, जिससे शासन व विभाग की छवि धूमिल हुई है।
महासमुंद जिले में कार्यरत कर्मचारियों द्वारा उच्च न्यायालय बिलासपुर में दायर की गई याचिका डब्ल्यू.पी.एस. नं. 1745/2022 के संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद को विभागीय आदेश क्रमांक ला/1064/2025 अटल नगर दिनांक 26.11.2025 के द्वारा प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया गया था। प्रकरण में विजय कुमार लहरे, प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद द्वारा तत्काल कार्रवाई नहीं की गई।
इस संबंध में संचालनालय के विधि शाखा प्रभारी द्वारा भी 3 दिसम्बर 2025 को उन्हे व्यक्तिगत व्हॉट्सऐप के माध्यम से अवगत कराया गया था। जिसे भी अनदेखा कर आदेश की अवहेलना करते हुए उक्त प्रकरण में उच्च न्यायालय में अपील दायर नहीं किया गया। लहरे ने अपने पदीय दायित्वों एवं कर्तव्यों के प्रति सजगता से कार्य नहीं करते हुए स्वेच्छाचारिता मनमाना संव्यवहार किया है।
अंकेक्षण प्रतिवेदन के अनुसार विजय कुमार लहरे, प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद के कार्यकाल के दौरान विभागीय लेखाओं के अंकेक्षण में गंभीर अनियमितता पायी गई है।
विजय कुमार लहरे, जिला शिक्षा अधिकारी, महासमुन्द द्वारा अपने पदीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही, स्वेच्छाचारिता एवं अनुशासनहीनता की गई है। लहरे का यह कृत्य छ.ग. सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-5/3 के विपरीत गंभीर कदाचार है। उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया।