क्रूरता की सारी हदें पार: प्रेमिका और मासूम बेटी की बेरहमी से हत्या, उम्रकैद की सजा बरकरार
बिलासपुर। बेटी के साथ रेप के आरोप में जेल में बंद युवक ने जमानत पर छूटने के बाद प्रेमिका की गला रेत कर हत्या कर दी। उसके बाद प्रेमिका की बेटी जिसके साथ रेप के आरोप में जेल में बंद था, उसे अधमरा किया और रेलवे ट्रैक पर लिटाकर हत्या कर दी। छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने ट्रायल कोर्ट के आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी है। हाई कोर्ट ने इसे जघन्य हत्याकांड के अलावा सोची समझी और बर्बर कृत्य करार दिया है।
छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने रायपुर में एक महिला और उसकी नाबालिग बेटी की बेरहमी से हत्या करने के आरोपी की आजीवन कारावास को बरकरार रखा है। 22 वर्षीय आरोपी बलात्कार और यौन शोषण के मामले में जमानत पर रिहाई के बाद एक और अपराध को अंजाम दिया था। इससे पहले महिला ने उसके खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज कराया था और वह बेटी से जुड़े पॉक्सो मामले में भी मुकदमे का सामना कर रहा था। मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पाया, परिस्थितिजन्य, चिकित्सा और वैज्ञानिक साक्ष्यों की श्रृंखला ने संदेह से परे उसकी दोषसिद्धि को “स्पष्ट रूप से” स्थापित कर दिया है|
अभियुक्त की पागलपन की दलील को खारिज करते हुए, चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने 11 मई को अभियुक्त द्वारा 19 जुलाई, 2022 के फैसले के खिलाफ दायर आपराधिक अपील को खारिज कर दिया।
आरोपी ने महिला की गर्दन पर चाकू से वार किया। इसके बाद उसने कथित तौर पर उसकी बेटी को पास की रेलवे पटरी पर ले जाकर छोड़ दिया, जहां एक मालगाड़ी ने उसे कुचल दिया। ट्रायल कोर्ट ने उन्हें आईपीसी की धारा 302 और 201 के तहत महिला और उसकी नाबालिग बेटी की हत्या के लिए दोषी ठहराया था।
मामले की सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने माना कि अभियोजन पक्ष ने सफलतापूर्वक दोष सिद्ध करने वाली परिस्थितियों की एक पूर्ण और अटूट श्रृंखला स्थापित कर दी है, जिससे याचिकाकर्ता की संलिप्तता के संबंध में “किसी भी उचित संदेह की कोई गुंजाइश नहीं” रह गई है।
पढ़िए क्या है मामला?
आरोपी ने 22 जनवरी, 2021 की रात रायपुर के जोरा मैदान के पास महिला की गर्दन पर चाकू से वार करके उसकी हत्या कर दी।उस पर पीड़ित महिला से शादी करने का दबाव था और उसने पहले भी उसे और बच्चे दोनों को जान से मारने की धमकी दी थी। इसके बाद उसने कथित तौर पर उसकी नाबालिग बेटी को पास के रेलवे ट्रैक पर ले जाकर छोड़ दिया था। जहां एक मालगाड़ी ने उसे कुचल दिया। अभियोजन पक्ष ने आगे आरोप लगाया कि आरोपी ने अपराध में इस्तेमाल किए गए चाकू को छिपाकर और मोबाइल फोन को तालाब में फेंककर सबूतों को नष्ट करने का प्रयास किया। अदालत ने माना, इस साक्ष्य से आरोपी की ओर से ” तैयारी और पूर्व-मौजूद इरादे” का पता चलता है। डिवीजन बेंच ने गौर किया, आरोपी को पहले पीड़िता महिला द्वारा दर्ज किए गए बलात्कार के मामले में गिरफ्तार किया गया था और नाबालिग बेटी के साथ यौन उत्पीड़न करने के बाद उसे पॉक्सो मामले में दोषी ठहराया गया था।
डिवीजन बेंच ने पाया कि अभियोजन पक्ष द्वारा सिद्ध की गई प्रत्येक परिस्थिति केवल अपराध की परिकल्पना के अनुरूप थी और निर्दोषता की हर संभावना को खारिज करती थी। डिवीजन बेंच ने यह भी कहा, एफएसएल रिपोर्ट ने आरोपी के पास से बरामद चाकू और उसके कपड़ों पर मानव रक्त की उपस्थिति की पुष्टि की। डीएनए रिपोर्ट ने आरोपी, महिला और उसकी बेटी के बीच संबंध को भी स्थापित किया। अभियोजन पक्ष द्वारा मकसद और पक्षों के बीच संबंधों के बारे में बताई गई कहानी की पुष्टि होती है। अदालत ने आरोपी द्वारा ग्राम पंचायत के पूर्व सरपंच के समक्ष कथित तौर पर दिए गए गैर-न्यायिक इकबालिया बयान पर भी काफी हद तक भरोसा किया।
आरोपी के अचानक उकसावे और पागलपन की दलील को खारिज करते हुए, डिवीजन बेंच ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे मानसिक अस्वस्थता या गंभीर उकसावे का संकेत मिले। कोर्ट ने माना कि अपराध की क्रूरता, पूर्व धमकियां और आरोपी का बाद का आचरण स्पष्ट रूप से “सोची-समझी, सुनियोजित और जानबूझकर की गई कार्रवाई” को दर्शाता है।
डिवीजन बेंच ने अपराध की प्रकृति पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अभियुक्तों द्वारा किए गए कृत्य “पूर्ण विकृति और मानव जीवन के प्रति पूर्ण उपेक्षा” को प्रकट करते हैं। कोर्ट ने आगे कहा, मां की हत्या करने के बाद एक नाबालिग बच्ची को रेलवे ट्रैक पर छोड़ देना इस कृत्य के परिणामों के प्रति पूर्ण जागरूकता को दर्शाता है। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणियों के साथ ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी है।