डिजिटल अरेस्ट गैंग का पर्दाफाश: 2.03 करोड़ की ठगी, 18 खातों से 10.76 करोड़ का ट्रांजेक्शन, 17 राज्यों में दर्ज हुईं 88 शिकायतें

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रायपुर। रायपुर रेंज आईजी अमरेश मिश्रा के निर्देश पर साइबर पुलिस ने ठगी की बड़ी घटनाओं को अंजाम देने वाले तीन अंतरराज्यीय आरोपियों को पकड़ा है। आरोपियों ने 2.03 करोड़ की ठगी की घटना को अंजाम दिया था। पकड़े गए मुख्य ठग से पुलिस ने 18 म्यूल बैंक खाता जब्त किया है। इन खातों में करीब 10.76 करोड़ की ट्रांजेक्शन की जानकारी मिली है। आरोपियों के खिलाफ 17 अलग-अलग राज्यों में 88 साइबर रिपोर्ट दर्ज है।

पहला मामला

पीड़ित सपन कुमार द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराया गया कि अज्ञात मोबाइल नंबर धारकों ने स्वयं को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर प्रार्थी के क्रेडिट कार्ड के विरुद्ध मनी लॉन्ड्रिंग का झूठा मामला दर्ज होने की बात कहकर डराया-धमकाया। इसके बाद प्रार्थी को 24 घंटे व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर जुड़े रहने के लिए मजबूर कर “डिजिटल अरेस्ट” किया और लगभग 1.25 करोड़ की धोखाधड़ी कर ली गई।

प्रकरण में थाना विधानसभा में अपराध क्रमांक 22/26 धारा 318(4), 3(5) बीएनएस एवं 66(D) आईटी एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया। जाँच के दौरान ठगी की राशि को विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया। पुलिस ने तत्काल इन खतों को होल्ड करवाया। साथ ही न्यायालय की प्रक्रिया के माध्यम से 60 लाख की राशि लगभग पीड़ित को वापस दिलाई गई।

जाँच के दौरान प्रकरण में संलिप्त मुख्य आरोपियों की पहचान की गई। आरोपी घटना के पश्चात लगातार अपना स्थान बदल रहा था। पुलिस टीम द्वारा आरोपी आर्यन सिंह को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया। प्रकरण में पूर्व में भी एक अन्य आरोपी को पकड़ा जा चुका है।

दूसरा मामला

पीड़िता पुष्पा अग्रवाल द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराई गई कि अज्ञात मोबाइल नंबर धारकों ने खुद को दिल्ली क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर प्रार्थीया के खिलाफ झूठा मामला दर्ज होने की बात कहकर डराया। इसके बाद पीड़िता को 24 घंटे व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर जुड़े रहने के लिए मजबूर कर “डिजिटल अरेस्ट” किया, फिर लगभग 42 लाख की धोखाधड़ी किया।

प्रकरण में थाना कोतवाली रायपुर में अपराध क्रमांक 201/25 धारा 318(4), 3(5) बीएनएस एवं 66(D) आईटी एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया। साथ ही आरोपी की पहचान की गई। आरोपी घटना के पश्चात लगातार अपना स्थान बदल रहा था। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम को कर्नाटका रवाना किया गया। पुलिस टीम द्वारा आरोपी जितेंद्र कुमार को हुबली कर्नाटका से पकड़ा गया। आरोपी सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट का कार्य करता है।

तीसरा मामला

थाना सिविल लाइन रायपुर में अपराध क्रमांक 44/25 धारा-317(2), 317(4), 317(5), 3(5) बीएनएस पंजीबद्ध किया गया था। अपराध में छत्तीसगढ़ व अन्य राज्यों के पीड़ितों के साथ 36 लाख रुपए की साइबर धोखाधड़ी की गई थी। उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक के 104 म्यूल अकाउंट और मोबाइल सिम संलिप्त पाए गए। अपराध की जाँच रेंज साइबर थाना रायपुर में की जा रही है।

जाँच क्रम में पूर्व में म्यूल बैंक खातों का विश्लेषण कर अपराध में संलिप्त 92 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। बैंक व मोबाइल सिम सर्विस प्रदाता कंपनियों से प्राप्त दस्तावेजों व गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर आरोपी राजदीप सिंह भाटिया को पूर्व में गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया है।

आरोपियों के नाम

1 आर्यन सिंह पिता राजेश सिंह उम्र 22 वर्ष वर्तमान पता के आर मंगलम यूनिवर्सिटी गुड़गांव दिल्ली, स्थाई पता धूमनगंज इलाहाबाद उत्तरप्रदेश

2 जितेन्द्र कुमार पिता नागराज उम्र 33 वर्ष स्थायी पता- हुबली धारवाड़ कनार्टका

3 राजदीप सिंह भाटिया उर्फ यश भाटिया पिता बलजीत सिंह भाटिया उम्र 29 वर्ष पता डोंगरगढ़, राजनांदगांव

 

 

 

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