तिहरे हत्याकांड में निलंबित रहे अधिकारी को सौंपा सोमनी थाना, बीमार नाबालिग से कथित बर्बरता के बाद घिरा पुलिस महकमा
रायपुर। राजनांदगांव के सोमनी थाने में 14 साल की बीमार बच्ची के साथ पुलिस कर्मियों ने शर्मनाक आचरण किया, उस घटना ने पूरे प्रदेश को हिला दिया है। राज्य सरकार ने भी इस घटना को गंभीरता से लिया है। सरकार के निर्देश पर राजनांदगांव के कलेक्टर जीतेंद्र यादव ने अलग-अलग दो जांच दल गठित कर यथाशीघ्र रिपोर्ट मांगी है। कलेक्टर की जांच से सरकार की गंभीरता समझी जा सकती है। आमतौर पर अपराधिक मामलों की शिकायतों की जांच पुलिस के अधिकारी ही करते हैं। मगर काफी दिनों बाद छत्तीसगढ़ में इस तरह हुआ कि जिला दंडाधिकारी ने जांच के लिए दो कमेटियां बना दी। उसमें एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट और ज्वाइंट कलेक्टर शामिल हैं। इससे अलग हेल्थ विभाग की एक अलग कमेटी बनाई गई है, जिसके मुखिया सीएमओ हैं।
बहरहाल, बताते हैं सोमनी थाने के टीआई अरुण नामदेव पहले से काफी विवादित रहे हैं। पिछले साल सितंबर में उनके चिखली चौकी प्रभारी रहते चाकू मारकर तीन लोगों की हत्याएं कर दी गई थी। इसमें पुलिस की भूमिका को लेकर बड़ा बवाल हुआ था। कांग्रेस की इस घटना की जांच के लिए आठ सदस्यीय कमेटी बनाई थी। उधर, राज्य सरकार ने भी इस हत्याकांड को गंभीरता से लिया था। विधानसभा अध्यक्ष डॉ0 रमन सिंह खुद घटनास्थल का दौरा किया था। इस घटना में चौकी प्रभारी अरुण नामदेव और एक एएसआई को निलंबित किया गया था। मगर कुछ दिन बाद ही नामदेव को सोमनी जैसे थाने का टीआई बना दिया गया, जहां 25 मई को नाबालिग बच्ची के साथ बर्बरतापूर्ण घटना हुई।
14 साल की बीमार बच्ची के साथ पुलिस वालों ने ऐसी बर्बरता पेश की, जो तालिबानी भी नहीं करते होंगे। बच्ची को उस जुर्म की सजा रात भर थाने में भुगतनी पड़ी। उससे रात भर पुलिस पूछती रही, बता तूने किसके साथ संबंध बना गर्भवती हुई है। जबकि, सच्चाई यह थी कि वह गर्भवती ही नहीं थी। सिर्फ पेट में दर्द था। मगर सोमनी स्वास्थ्य केंद्र में उसे गर्भवती बता दिया गया। अगले दिन राजनांदगांव जिला अस्पताल में जब उसका प्रेग्नेंसी टेस्ट हुआ, तो सिस्टम के पैरों तले जमीन खिसक गई। टेस्ट निगेटिव आया।
नाबालिग बीमार बच्ची के साथ यह घटना तब हुई, जब राजनांदगांव में महिला पुलिस कप्तान हैं। उपर से सुशासन तिहार चल रहा है। सरकार ने कड़े निर्देश जारी कर लोगों की समस्याओं का समाधान करने कहा है। मगर राजनांदगांव जिले में उल्टा हो रहा। वहां की पुलिस ने शर्मनाक कांड को अंजाम दे दिया।
सरकार के निर्देश पर राजनांदगांव के कलेक्टर जीतेंद्र यादव ने शीर्ष अधिकारियों के नेतृत्व में अलग-अलग दो जांच कमेटी गठित कर दी है। पहली चार सदस्यी जांच कमेटी में अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी सीएल मार्कण्डेय, ज्वाइंट कलेक्टर शीतल बंसल, एसडीएम गौतमचंद पाटिल और सीएसपी अलेक्जेंडर किरो शामिल हैं। दूसरी जांच कमेटी में नाबालिग की प्रेग्नेंसी टेस्ट में चूक की जांच करेगी। इसमें सीएमओ नेतराम नवरतन, डीपीएम संदीप ताम्रकार, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ0 तरुण कोठारी और पैथालॉजिस्ट डॉ0 भार्गव तिवारी मेंबर हैं। आदेश में कलेक्टर ने दोनों जांच कमेटियों को यथाशीघ्र रिपोर्ट देने कहा है।
कलेक्टर ने जांच के आदेश में सात बिंदुओं को उल्लेखित किया है, जिस पर जांच होगी। मसलन, 25 मई को सोमनी थाने में नाबालिग बच्ची के साथ प्रताड़ना की घटना का वास्तविक और तथ्यात्मक स्वरुप क्या है। घटना किन परिस्थितियों में हुई और उस समय थाने में कौन-कौन मौजूद थे। इसके अलावे थाने के सभी स्टाफ का बयान लेने के साथ सीसीटीवी की फुटेज भी जांच में शामिल होगा।
पूरा मामला जिले के सोमनी थाने का है. पीड़िता बच्ची सोमनी क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली 14 साल की नाबालिग है. पिछले कुछ समय से बच्ची बीमार थी. मासिक धर्म से जुड़ी पेट दर्द की शिकायत थी। पेट दर्द की शिकायत बढ़ने के बाद परिजन उसे 25 मई को सोमनी स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इलाज के लिए ले गए।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के स्टाफ ने जांच के बाद बच्ची को गर्भवती बता दिया. जिसे सुन परिवार वालों के पैरों तले जमीन खिसक गयी. इसके बाद जो हुआ वह हैरान कर देने वाला था. बच्ची को गर्भवती बताने के बाद इसकी सूचना पुलिस को दी गयी. फिर क्या सोमनी पुलिस ने देर रात किशोरी को उसके रिश्तेदार के घर से उठा लिया और पूरी रात थाने में बिठाए रखा.
आरोप है रात 10 बजे से सुबह पांच बजे तक उसे थाने में बिठाकर प्रताड़ित किया गया. महिला कांस्टेबल ने पूछताछ के नाम पर बच्ची को टॉर्चर किया. किशोरी का गला दबाने की कोशिश की, गाली-गलौच और मारपीट किया. इतना ही नहीं नाबालिग से बेहद ही शर्मनाक सवाल किया गया. पूछा गया,-उसने किससे सम्बन्ध बनाया. अगले दिन दुबारा बच्ची का टेस्ट कराया गया जिसमें रिपोर्ट नेगेटिव आई.
आरोप है जांच के दौरान भी बच्ची से मारपीट की गयी. उसके शरीर पर चोट के निशान हैं. महिला कांस्टेबल द्वारा गला दबाने के चलते बच्ची के गले में सुजन हैं. बच्ची सदमे में हैं दो दिन से कुछ भी नहीं खा रही है.