रेलवे का नया दांव! नियमित ट्रेन को स्पेशल बनाकर वसूला जा रहा अतिरिक्त किराया…
बिलासपुर। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे जोन कमाई के नाम पर आगे है, मगर यात्रियों को सुविधा देने में पीछे चल रहा है। अब हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसमें सीधे- सीधे यात्रियों से ज्यादा किराया वसूला जाएगा। समर स्पेशल ट्रेन के नाम पर रेलवे ने उस ट्रेन को स्पेशल घोषित कर दिया, जिसे नियमित रूप से चलाने का आदेश हो चुका है। रेल मंत्रालय ने बिलासपुर- येलहंका (बेंगलुरू) एक्सप्रेस को नियमित रूप से चलाने का फैसला किया है, इसका आदेश अब तक तो जारी नहीं किया गया, उल्टे इसे समर स्पेशल घोषित कर यात्रियों को धोखा दिया जा रहा है। आदेश के बाद भी इस ट्रेन को अब तक पटरी पर नहीं उतारा गया है और इसी का फायदा रेलवे उठा रही है।
बता दें, स्पेशल ट्रेन का किराया नियमित ट्रेन से ज्यादा होता है। सूत्रों ने बताया कि रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के पत्र 23 मार्च 2026 में साफ आदेश दिया गया था कि विशेष गाड़ी संख्या 08261/08262 के अस्थायी संचालन को समाप्त कर, इसे नियमित गाड़ी संख्या 18261/18262 बिलासपुर-येलहंका एक्सप्रेस के रूप में स्थायी तौर पर चलाया जाए। हैरानी की बात यह है कि रेलवे ने इस ट्रेन का परिचालन शुरू ही नहीं किया था, जबकि आदेश से पता चलता है कि इसे स्पेशनल चलाना केवल कागजों में दिखाया गया था। यही कारण है कि दो माह बाद भी बिलासपुर रेल मंडल द्वारा इसे नियमित ट्रेन के रूप में शुरू नहीं किया गया। अब इसे ही स्पेशल ट्रेन बता कर आदेश को अटका दिया गया है। खबर है कि एक यात्री अजय कुमार ने रेलवे बोर्ड और दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में इसकी आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है। ज्ञात हो कि रेलवे द्वारा एक बार फिर से बिलासपुर- यलहंका (बेंगलुरू) के मध्य समर स्पेशल ट्रेन के रूप में चलाने की घोषणा की गई है। यह ट्रेन 20 कोचों के साथ 3 जून से 1 जुलाई तक प्रत्येक बुधवार को बिलासपुर तथा 4 जून से 2 जुलाई तक प्रत्येक गुरूवार को यलहंका से संचालित होगी।
छत्तीसगढ़ में कई लोकल ट्रेनों को कोरोना काल के बाद स्पेशल बना कर चलाया जा रहा था। इसमें रोजाना यात्रियों को अधिक किराया देना पड़ रहा था। इस पर बवाल होने के बाद सभी ट्रेनों को नियमित का दर्जा दिया गया था। इसी तरह देश के अन्य रेल जोनों में स्वीकृत होते ही ट्रेनों को तुरंत रेगुलर कर दिया गया, लेकिन बिलासपुर मंडल में जानबूझकर लटकाया जाता है। ट्रेन के रेगुलर नहीं होने से यात्रियों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। स्पेशल ट्रेनों का संचालन अस्थायी होता है और कभी भी बंद कर दिया जाता है। साथ ही नियमित ट्रेन की तुलना में स्पेशल ट्रेनों के ठहराव और कोचों के प्रबंधन में हमेशा ढिलाई देखने को मिलती है।