सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: CBI को झटका, विजय केला के खिलाफ दर्ज FIR और चार्जशीट सुप्रीम कोर्ट ने की निरस्त

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के बड़े कारोबारी विजय कुमार केला को देश की सबसे बड़ी अदालत से बहुत बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ सीबीआई (CBI) की एफआईआर और चार्जशीट को पूरी तरह से रद्दी की टोकरी में डाल दिया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद छत्तीसगढ़ के व्यापारिक हलकों में खलबली मच गई है।

मामला फर्म मेसर्स मोहन ट्रेडर्स से जुड़ा है। इसे विजय केला के बड़े भाई स्वर्गीय परमानंद केला संभालते थे। फर्म ने यूको बैंक से लोन लिया था, जो 2009 तक बढ़कर 8 करोड़ रुपए हो गया। इसके बदले रायपुर के अमलीडीह और बोरियाखुर्द की कीमती जमीनें बैंक के पास गिरवी थीं। परमानंद केला की अचानक मौत के बाद धंधा बैठ गया और बैंक की किस्तें रुक गईं। बैंक ने खाते को एनपीए (NPA) घोषित कर दिया और वसूली के लिए जबलपुर डीआरटी (DRT) पहुंच गया।

डीआरटी में केस चलने के दौरान ही बैंक और केला परिवार के बीच आपसी सहमति बन गई। दोनों पक्षों ने 4.25 करोड़ रुपए में ‘फुल एंड फाइनल’ सेटलमेंट कर लिया। पैसा चुका दिया गया और खाता बंद हो गया। लेकिन कहानी में ट्विस्ट इसके ढाई साल बाद आया। फरवरी 2018 में यूको बैंक के जोनल हेड ने सीबीआई में शिकायत ठोक दी। आरोप लगाया कि लोन लेने के लिए सीए की फर्जी ऑडिट रिपोर्ट लगाई गई थी और जालसाजी करके कीमती जमीनें छुड़ा ली गईं। सीबीआई ने तुरंत केस दर्ज कर रायपुर की स्पेशल कोर्ट में चार्जशीट भी दाखिल कर दी।

हाईकोर्ट से झटका लगने के बाद विजय केला ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुयान की बेंच ने अब इस पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ कहा कि जब बैंक और ग्राहक के बीच आपसी सहमति से वन-टाइम सेटलमेंट (OTS) हो चुका है, तो उसके बाद धोखाधड़ी का क्रिमिनल केस चलाना सिर्फ और सिर्फ कोर्ट का समय बर्बाद करना है।

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