हाई कोर्ट का बड़ा आदेश: मीडिएशन सेंटर में 1 लाख जमा करने पर ही मिलेगी गिरफ्तारी से राहत, दो सप्ताह की दी मोहलत
बिलासपुर। दहेज व शारीरिक प्रताड़ना का आरोप झेल रहे पति,सास व ससुर की याचिका पर सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने पति अंकुर गौराहा को हाई कोर्ट के मीडिएशन सेंटर में एक लाख रुपये जमा करने का निर्देश दिया है। इसके लिए दो सप्ताह की मोहलत दी है। राशि जमा कराने के बाद रसीद संबंधित जिले के एसपी को दिखाने कहा है, इसके बाद ही गिरफ्तारी पर रोक का जारी आदेश प्रभावी होगा। पति-पत्नी को मीडिएशन सेंटर में उपस्थिति दर्ज कराने व सेंटर प्रभारी को दोनाें के बीच आपसी विवाद को सुझलाने का निर्देश दिया है।
छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने साफ कहा है, यदि निर्धारित अवधि में एक लाख रुपये जमा नहीं किए गए तो गिरफ्तारी पर दी गई अंतरिम सुरक्षा स्वतः समाप्त हो जाएगी। साथ ही आपराधिक याचिका भी बिना किसी अतिरिक्त आदेश के स्वतः खारिज मानी जाएगी। हाई कोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले में पति और उसके माता-पिता को अंतरिम राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। साथ ही दंपती के बीच विवाद को सुलझाने के लिए मामले को हाई कोर्ट के मीडिएशन सेंटर भेजने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि यदि दोनों पक्षों के बीच अंतिम समझौता हो जाता है तो जमा कराई जाने वाली राशि को उसी में समायोजित किया जाएगा।
छत्तीसगढ़ बिलासपुर के राजकिशोर नगर निवासी अंकुर गौराहा (32 वर्ष), पिता राकेश गौराहा (64 वर्ष) और मां रेखा गौराहा के खिलाफ अंकुर की पत्नी भाव्या गौराहा ने सारंगढ़-बिलाइगढ़ जिले के सारंगढ़ थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। याचिकाकर्ताओं ने अधिवक्ता मलय श्रीवास्तव के माध्यम से छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में याचिका दायर कर एफआईआर और आगे की दंडात्मक कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कहा है, पत्नी भव्या गौराहा द्वारा लगाए गए आरोप झूठे, मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार शिकायत काफी विलंब से दर्ज कराई गई है तथा इसमें दहेज मांग या क्रूरता के कोई स्पष्ट और विश्वसनीय आरोप नहीं हैं।
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, मामला वैवाहिक विवाद से जुड़ा है, लिहाजा इसे मध्यस्थता के माध्यम से सुलझाने का प्रयास किया जाना चाहिए। कोर्ट ने दोनों पक्षों को 8 जून 2026 को हाई कोर्ट के मीडिएशन सेंटर में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने 29 जून 2026 तक याचिकाकर्ताओं की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है, कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं में जांच में पूरा सहयोग देने की शर्त रख दी है।