वक्फ बोर्ड का बड़ा फैसला: दरगाह परिसरों में DJ पूरी तरह प्रतिबंधित, उल्लंघन पर कार्रवाई तय…

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वक्फ बोर्ड: छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड ने प्रदेश की तमाम दरगाहों, मजारों, उर्सों और मजहबी जलसों में डीजे, धुमाल, नाच-गाना और गैर-शरई कार्यक्रमों पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी है। वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सलिमराज ने इस संबंध में राज्य के समस्त जिला पुलिस अधीक्षकों (SP) को आवश्यक दिशा-निर्देश और सख्त कार्रवाई के लिए पत्र जारी किया है।

इस फैसले से छत्तीसगढ़ में धार्मिक स्थलों पर होने वाले शोर-शराबे और हुड़दंग पर लगाम लगेगी। उर्स और संदल जैसे पवित्र आयोजनों की गरिमा बनी रहेगी और देर रात तक बजने वाले डीजे से स्थानीय निवासियों को होने वाली परेशानी से बड़ी राहत मिलेगी।

जमात रजा ए मुस्तफा, रायपुर द्वारा 23 मई 2026 को सौंपे गए मांग पत्र के बाद छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड ने यह कदम उठाया है। शिकायत में कहा गया था कि उर्स के दौरान तेज आवाज में डीजे बजाना और जुलूसों में नर्तकियों को बुलाकर फूहड़ कार्यक्रम आयोजित करना कुरआन, हदीस और सूफी संतों के आदेशों के खिलाफ है। इससे समाज का माहौल दूषित हो रहा था, जिसे रोकने के लिए अब नियमों को कड़ा कर दिया गया है।

नए आदेश के मुताबिक, अब दरगाहों और मजारों में उर्स के अवसर पर संदल चादर का समय रात 11:00 बजे तक ही निर्धारित रहेगा। इसके बाद किसी भी तरह के आयोजन की अनुमति नहीं होगी। नियमों का उल्लंघन करने वाली संस्था या व्यक्ति के खिलाफ सीधे जब्ती और आर्थिक दंड की कार्रवाई की जाएगी।

तारीख और संदर्भ: जमात रजा ए मुस्तफा के पत्र क्रमांक 06/2026 दिनांक 23.05.2026 के आधार पर निर्देश जारी।

समय सीमा: संदल चादर का अंतिम समय रात 11:00 बजे तक तय किया गया है।

जुर्माना: नियमों का उल्लंघन कर डीजे या धुमाल बजाने पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगेगा।

कड़ी कार्रवाई: डीजे, धुमाल और संबंधित उपकरणों को मौके पर ही जब्त करने के आदेश दिए गए हैं।

इस आदेश के बाद अब छत्तीसगढ़ के सभी जिलों की पुलिस दरगाहों और उर्स कमेटियों के साथ बैठक कर नए नियमों का पालन सुनिश्चित कराएगी। आगामी उर्स और संदल आयोजनों में नियमों का उल्लंघन करने वालों पर पुलिस और वक्फ बोर्ड की संयुक्त टीमें सीधी नजर रखेंगी।