हाई कोर्ट ने कहा- आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता, फैसले से मिली बड़ी राहत

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के एक मामले में कहा है, यदि दिवंगत पंचायत शिक्षक का आश्रित शिक्षक पद की अनिवार्य योग्यता नहीं रखता, तो केवल इस आधार पर उसकी अर्जी खारिज कर देना अनुचित और मनमाना है। जस्टिस राकेश मोहन पांडेय के सिंगल बेंच ने दुर्ग जिला पंचायत के पुराने आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की शैक्षणिक योग्यता के अनुसार किसी स्वीकृति और रिक्त चतुर्थ श्रेणी के पद पर अनुकंपा नियुक्ति देने विचार करने कहा है।

याचिकाकर्ता राकेश कुमार वर्मा के पिता चमन लाल वर्मा दुर्ग जिले में ‘सहायक शिक्षक (पंचायत)’ के पद पर कार्यरत थे। 15 अक्टूबर 2015 को सेवाकाल के दौरान उनका निधन हो गया था। पिता की मृत्यु के बाद राकेश ने 23 सितंबर 2016 को अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत दुर्ग ने 30 जुलाई 2018 को खारिज कर दिया।

प्रशासन का तर्क था कि याचिकाकर्ता के पास सहायक शिक्षक (पंचायत) पद के लिए आवश्यक शैक्षणिक व व्यावसायिक योग्यता डी.एड, बी.एड. या टीईटी नहीं है, इसलिए उसे नौकरी नहीं दी जा सकती।

याचिका की सुनवाई जस्टिस राकेश मोहन पांडेय के सिंगल बेंच में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता बीपी. राव ने कोर्ट को बताया कि विभाग की अनुकंपा नियुक्ति के संबंध में नीतियां लगातार बदलती रही है। अधिवक्ता ने नियमों का हवाला देते हुए कहा, 2014 के सर्कुलर के तहत दिवंगत पंचायत शिक्षक के आश्रित को योग्यता होने पर सीधे सहायक शिक्षक (पंचायत) बनाया जा सकता था। अधिवक्ता ने कोर्ट को जानकारी दी, राज्य शासन ने पुराने सर्कुलर को बदलते हुए 2016 में नया आदेश पारित कर दिया, इसके अनुसार, यदि आश्रित के पास शिक्षक पद की योग्यता नहीं है, तो उसे ‘ग्राम पंचायत सचिव’ के रिक्त पद पर नियुक्त किया जाए। इसे रद्द कर राज्य शासन ने 2017 में नई पाॅलिसी बना ली। जिससे शिक्षाकर्मियों के आश्रितों के लिए अनुकंपा का रास्ता लगभग बंद हो गया।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट के सामने पैरवी करते हुए कहा, यदि शिक्षक या सचिव पद की योग्यता नहीं थी, तो प्रशासन को आवेदक के जीवन-यापन के लिए उसकी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता के आधार पर किसी चतुर्थ श्रेणी पद पर विचार करना चाहिए था। राज्य सरकार और जनपद पंचायत के अधिवक्ताओं ने जिला पंचायत के आदेश का बचाव करते हुए कहा, पंचायत नियमों में शिक्षाकर्मी के आश्रित को सीधे चतुर्थ श्रेणी पद देने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं था।

याचिका की सुनवाई जस्टिस राकेश मोहन पांडेय के सिंगल बेंच में हुई। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, याचिकाकर्ता को अनुकंपा नियुक्ति से सिर्फ इसलिए वंचित कर दिया गया क्योंकि विचार करने की तिथि पर उसके पास सहायक शिक्षक (पंचायत) पद की आवश्यक योग्यता नहीं थी। प्रशासन का यह तर्क पूरी तरह से अतार्किक, अनुचित और मनमाना है। अनुकंपा नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य पीड़ित परिवार को अचानक आए संकट से उबारना है। कोर्ट ने जिला पंचायत दुर्ग के सीईओ को निरस्त कर दिया है।

कोर्ट ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग और जिला पंचायत दुर्ग को आदेश दिया है, याचिकाकर्ता की शैक्षणिक योग्यता की जांच कर उसे किसी भी स्वीकृत और रिक्त चतुर्थ श्रेणी पद पर अनुकंपा नियुक्ति प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू करें। हाई कोर्ट ने आदेश की प्रति मिलने के चार महीने के भीतर अनुकंपा नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है।