एथेनॉल को लेकर सरकार का बड़ा दावा: रेसिंग कारों से आम वाहनों तक बढ़ा इस्तेमाल, माइलेज पर क्या पड़ता है असर?
एथेनॉल| एथेनॉल मिश्रण को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार ने इसे लेकर अपना पक्ष स्पष्ट किया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि एथेनॉल केवल वैकल्पिक ईंधन नहीं, बल्कि उच्च प्रदर्शन वाले इंजनों के लिए भी उपयोगी साबित हो रहा है। उनका दावा है कि रेसिंग कारों में इसके सफल इस्तेमाल से इंजन की क्षमता और प्रदर्शन दोनों बेहतर हुए हैं। मंत्री ने कहा कि सरकार की जैव ईंधन नीति का उद्देश्य देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना, किसानों की आय बढ़ाना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है।
हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया कि भारत फिलहाल E20 मिश्रण के बाद अगले स्तर पर तभी जाएगा, जब सभी तकनीकी परीक्षण और सुरक्षा संबंधी मूल्यांकन पूरी तरह संतोषजनक होंगे। सरकार बिना पर्याप्त तैयारी के उच्च एथेनॉल मिश्रण लागू नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों और जैव ईंधन आधारित वाहनों, दोनों के लिए भविष्य में पर्याप्त संभावनाएं हैं और दोनों तकनीकों का अपना अलग महत्व है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि कुछ परिस्थितियों में इथेनॉल मिश्रण के कारण माइलेज में हल्की कमी महसूस हो सकती है, लेकिन इसके पीछे अन्य तकनीकी कारण भी हो सकते हैं।
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार कई देश पहले ही उच्च स्तर के एथेनॉल मिश्रण का उपयोग कर रहे हैं। अमेरिका में E10 व्यापक रूप से इस्तेमाल हो रहा है, जबकि E15 का दायरा लगातार बढ़ रहा है। वहीं बड़ी संख्या में फ्लेक्स-फ्यूल वाहन E85 पर भी चल रहे हैं। ब्राजील में E27 अनिवार्य किया जा चुका है और वहां 100 प्रतिशत एथेनॉल आधारित ईंधन की दिशा में काम जारी है। इसके अलावा कनाडा, थाईलैंड, जापान और कई यूरोपीय देशों ने भी उच्च इथेनॉल मिश्रण को अपनाया है।
देश में इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम वर्ष 2000 के दशक से लागू है। वर्ष 2013-14 में जहां देश की इथेनॉल उत्पादन क्षमता करीब 38 करोड़ लीटर प्रतिवर्ष थी, वहीं अब यह बढ़कर 2,000 करोड़ लीटर प्रतिवर्ष हो चुकी है। इसी अवधि में पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण का स्तर 1.5 प्रतिशत से बढ़कर दिसंबर 2025 तक 20 प्रतिशत (E20) पहुंच गया है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2014-15 से अब तक इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम से कई महत्वपूर्ण लाभ मिले हैं—
1.90 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत।
किसानों को 1.60 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान।
लगभग 310 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल के आयात में कमी।
करीब 930 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन में कमी।
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में संभावित कटौती के सवाल पर हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि अभी कोई फैसला करना जल्दबाजी होगी। यदि अगले दो से तीन महीनों तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम बनी रहती हैं, तो सरकार आगे की स्थिति की समीक्षा करेगी।