हाई कोर्ट की कड़ी टिप्पणी: पूर्व IAS की याचिका पर सुनवाई के दौरान तीन सचिवों को किया तलब

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के जस्टिस राकेश मोहन पांडेय ने वर्ष 2021 से लंबित एक महत्वपूर्ण रिट याचिका में अफसरों की लगातार लापरवाही को लेकर नाराजगी जताई है। सेवानिवृत्त आईएएस अफसर टी. राधाकृष्णन की ओर से दायर याचिका में बार-बार समय दिए जाने के बावजूद जवाब दाखिल नहीं किए जाने पर कोर्ट ने राज्य सरकार को 10 दिन की मोहलत दी है। जवाब पेश करने डेडलाइन तय करने के साथ ही चेतावनी दी है, यदि निर्धारित अवधि में जवाब पेश नहीं किया गया तो सामान्य प्रशासन, वित्त तथा राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सचिवों को 20 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होना पड़ेगा।

याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से पैरवी के लिए उपस्थित महाधिवक्ता कार्यालय के ला अधिकारी ने जवाब पेश करने के लिए एक बार फिर समय की मांग की। इस पर कोर्ट की नाराजगी सामने आ गई। कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा, मामला वर्ष 2021 से लंबित है और कई अवसर दिए जाने के बावजूद राज्य सरकार की ओर से अब तक जवाब पेश नहीं किया गया है। कोर्ट ने कहा, ऐसा लगता है, इस मामले में जवाब दाखिल करने को लेकर सरकार के अफसर गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं।

याचिका सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी टी. राधाकृष्णन ने भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक और छत्तीसगढ़ शासन के विरुद्ध हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। रिकार्ड के अनुसार राज्य शासन को पहले 27 फरवरी 2026 को चार सप्ताह, फिर 2 अप्रैल 2026 को पुनः चार सप्ताह इसके बाद 18 जून 2026 को अतिरिक्त दो सप्ताह का समय दिया गया था। इसके बावजूद जवाब दाखिल नहीं किया गया।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करने के लिए अधिवक्ता एमपीएस भाटिया , सीएजी की ओर से अधिवक्ता राजकुमार गुप्ता तथा राज्य शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता केशव गुप्ता उपस्थित रहे। कोर्ट ने राज्य शासन को अंतिम अवसर देते हुए 10 दिनों के भीतर जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है, यदि ऐसा नहीं होता है तो सामान्य प्रशासन विभाग, वित्त विभाग और राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सचिवों को 20 जुलाई 2026 को हाई कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा। मामले की अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने 20 जुलाई की तिथि निर्धारित कर दी है।

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